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एनजीओ का दावा, उत्तर कोरिया में सार्वजनिक रूप से मौत की सजा के 318 ठिकानों की पहचान

Wed, 12 Jun 2019 03:39 PM IST
शिल्पा ठाकुर बीबीसी, हिंदी
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उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन - फोटो : PTI
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दक्षिण कोरिया के एक एनजीओ का कहना है कि उसने उत्तर कोरिया के 318 ऐसे ठिकानों का पता लगाया है जिनका इस्तेमाल सरकार ने सार्वजनिक रूप से लोगों को मौत की सजा देने के लिए किया है। इस एनजीओ ने अपनी रिपोर्ट के लिए चार सालों तक 610 ऐसे लोगों से बात की है, जो देश छोड़ चुके हैं।

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इस रिपोर्ट में दशकों से होती आ रही मौत की सजाओं का विवरण है। मारे जाने वाले लोगों का गुनाह दक्षिण कोरियाई टीवी देखने से लेकर गाय चुराने तक का था। एनजीओ का कहना है कि नदी, मैदान, बाजारों, स्कूलों और खेल के मैदानों जैसी जगहों पर ये मौत की सजा सार्वजनिक रूप से दी गई। एनजीओ ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि ऐसी हत्याएं देखने के लिए एक हजार से ज्यादा लोगों की भीड़ इकट्ठा होती थी।

रिपोर्ट का दावा है कि दोषी व्यक्ति के परिवार को बच्चों समेत हत्या देखने के लिए मजबूर किया जाता था। मारे गए लोगों के शव शायद ही उनके परिवार को वापस दिए जाते थे। रिपोर्ट के मुताबिक मौत की सजा पाने वाले लोगों में से सबसे कम उम्र का व्यक्ति सात साल का बच्चा था। 
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कई सार्वजनिक मौत की सजा जेल और श्रमिक शिविरों में भी दी गईं, जहां राजनीतिक अपराधों की सजा काट रहे लोगों से शारीरिक कार्य कराए जाते थे।
देश छोड़ चुके एक शख्स ने बताया कि 2000 की शुरुआत में कैसे एक श्रमिक शिविर में चीन भागने का प्रयास करने वाली तीन महिलाओं की हत्या देखने के लिए 80 कैदियों को मजबूर किया गया था।

उन्होंने बताया कि मंत्रालय के सुरक्षा अधिकारी ने भीड़ पर चिल्लाते हुए कहा- "ऐसा तुम लोगों के साथ भी हो सकता है।" रिपोर्ट में कहा गया है कि इस तरह की हत्याएं लोगों में डर पैदा करने के लिए की जाती थीं, जिससे लोग वो काम न करे जो सरकार नहीं चाहती है।
 

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उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन - फोटो : File Photo

लोगों के समूहों पर गोलीबारी और फांसी

देश छोड़ चुके लोगों के अनुसार ज्यादातर मौत की सजा गोलीबारी के जरिए दी जाती थी। अक्सर तीन बंदूकधारी तीन बार दोषी व्यक्ति के शरीर पर गोली चलाते थे। जिन लोगों का इंटरव्यू किया गया उनमें से कुछ ने बताया कि इन हत्याओं को अंजाम देने वाले लोग नशे में धुत रहते थे। एक ने कहा- "ऐसा इसलिए किया जाता था।

क्योंकि किसी की जान लेना भावनात्मक रूप से आसान नहीं होता है।" सार्वजनिक रूप से कम संख्या में फांसी के मामले सामने आए। हालांकि एनजीओ का कहना है कि उनकी खाल भी खींच ली जाती थी।

रिपोर्ट लिखने वाले लोगों में से एक, एथन शिन ने बताया कि "ऐसा लगता है कि सार्वजनिक मौत की सजा की संख्या में अब गिरावट आ गई है", लेकिन प्योंगयांग अधिक गोपनीयता के साथ यह काम जारी रख सकता है ताकि उसे सामान्य देशों की गिनती में शामिल किया जा सके। अतीत में कई अधिकारियों को भी फांसी दी गई है। 2013 में किम-जोंग-उन के चाचा की देशद्रोह के लिए निंदा भी की गई थी।

लेकिन हत्याओं की खबरों को सुनिश्चित करना मुश्किल है और कुछ हत्याएं सच नहीं भी निकली हैं। 2013 में लोकप्रिय उत्तर कोरियाई गायिका ह्योन सोंग-उल की सार्वजनिक रूप से हत्या कर दी जाने की बात सामने आई थी। इस खबर को एक दक्षिण कोरियाई अखबार ने छापा था, लेकिन बाद में वह 2018 में शीतकालीन ओलंपिक में देखी गईं।
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