भारत में हो रहे लोकसभा चुनाव में पुलवामा हमले के बाद हुई एयर स्ट्राइक से लेकर महात्मा गांधी और नाथूराम गोडसे तक पर सियासी बयानबाजी हो चुकी है। लेकिन पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में अगर अभी चुनाव करा दिए जाएं तो वहां के लोगों के लिए बढ़ती महंगाई सबसे बड़ा मुद्दा रहेगा। हाल ही में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने देश की संसद में अपने देश की मुद्रा के गिरते मूल्य पर बयान दिया था। इमरान खान ने कहा कि उन्हें बढ़ती महंगाई का एहसास है लेकिन कर्ज उतारने के लिए मुश्किल वक्त से गुजरना पड़ेगा।
दरअसल, गैलप और गिलानी रिसर्च फाउंडेशन के सर्वे के अनुसार, पाकिस्तान में हर 3 में 1 यानी 33 प्रतिशत पाकिस्तानियों का मानना है कि मुद्रास्फीति या बढ़ती महंगाई उनके देश के लिए सबसे बड़ा और दबाव वाला मुद्दा है।
पाकिस्तान के चार प्रांतों के पुरुषों और महिलाओं का एक राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधित्व करने वाला नमूना लिया गया था, इसमें लोगों से पूछा गया कि आपकी राय में, पाकिस्तान के लिए अभी सबसे ज्यादा दबाव वाला मुद्दा क्या है? इसके जवाब में 33 प्रतिशत ने कहा महंगाई (मुद्रास्फीति), 19 प्रतिशत ने बेरोजगारी, 14 प्रतिशत ने भ्रष्टाचार, 6 प्रतिशत ने गरीबी, 5 प्रतिशत ने ऊर्जा संकट (बिजली और गैस), 7 प्रतिशत ने कोई नहीं का विकल्प चुना और 8 प्रतिशत ने अन्य कारण बताए। जबकि 8 प्रतिशत ने पता नहीं और जवाब नहीं देने की इच्छा जाहिर की।
इसी तरह शहरी क्षेत्रों में 34 प्रतिशत लोगों ने कहा कि महंगाई (मुद्रास्फीति), 17 प्रतिशत ने बेरोजगारी, 12 प्रतिशत ने भ्रष्टाचार, 6 प्रतिशत ने गरीबी, 5 प्रतिशत ने ऊर्जा संकट (बिजली और गैस), 13 प्रतिशत ने दूसरे मुद्दे और 2 प्रतिशत ने कहा कि कोई नहीं। 11 प्रतिशत को पता नहीं था या जवाब नहीं देने की इच्छा जताई। ग्रामीण क्षेत्रों में 33 प्रतिशत ने कहा कि मुद्रास्फीति या महंगाई, 20 प्रतिशत ने कहा बेरोजगारी, 15 प्रतिशत ने भ्रष्टाचार, 5 प्रतिशत ने कहा कि गरीबी, 5 प्रतिशत ने ऊर्जा संकट (बिजली और गैस), 9 प्रतिशत ने कहा कि कोई नहीं और 7 प्रतिशत ने अन्य मुद्दे, जबकि 6 प्रतिशत ने कहा पता नहीं या जवाब नहीं देने की मंशा जाहिर की।
यह अध्ययन गिलानी रिसर्च फाउंडेशन और गैलप इंटरनेशनल के पाकिस्तानी सहयोगी गैलप और गिलानी पाकिस्तान द्वारा किया गया था। 21 अप्रैल से 30 अप्रैल 2019 के दौरान देश के सभी चार प्रांतों के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में 1,480 पुरुषों और महिलाओं के नमूने लेकर सर्वेक्षण किया गया। सर्वे के लिए त्रुटि मार्जिन का अनुमान करीब 2-3 प्रतिशत धनात्मक या ऋणात्मक लगाते हुए आत्मविश्वास स्तर 95 प्रतिशत मानकर उचित ठहराया गया है।
बता दें कि गैलप इंटरनेशनल की ओर से पिछले साल जनवरी में 55 देशों के लोगों पर किए गए सर्वे के अनुसार लोकप्रिय नेताओं की सूची में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को तीसरे पायदान पर रखा था।