अमेरिका में भारतीय-अमेरिकी समुदाय के योगदान को सम्मानित करने के लिए प्रतिनिधि सभा में एक द्विदलीय प्रस्ताव पेश किया गया है। अमेरिकी सांसद राजा कृष्णमूर्ति ने सोमवार को यह प्रस्ताव पेश किया, जिसे 256 सांसदों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव में जुलाई को भारतीय-अमेरिकी विरासत माह घोषित करने का भी समर्थन किया गया है।
कृष्णमूर्ति ने कहा कि भारतीय-अमेरिकी समुदाय ने कई पीढ़ियों से अमेरिका को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि इस समुदाय के लोगों ने जीवन बचाने वाली खोजों से लेकर रोजगार पैदा करने वाले कारोबार और सेना व सार्वजनिक पदों पर सेवा देने तक देश में अहम योगदान दिया है।
विज्ञान से लेकर सेना तक योगदान का जिक्र
कृष्णमूर्ति के बयान के अनुसार, अमेरिका में 52 लाख से अधिक भारतीय-अमेरिकी रहते हैं। प्रस्ताव में विज्ञान और चिकित्सा, प्रौद्योगिकी और कारोबार, सार्वजनिक सेवा और सेना, शिक्षा, परोपकार, कला-संस्कृति तथा खेल के क्षेत्र में उनके योगदान को रेखांकित किया गया है।
कृष्णमूर्ति ने कहा कि उन्हें अपने 256 सहयोगियों के साथ जुलाई को भारतीय-अमेरिकी विरासत माह घोषित करने की पहल का नेतृत्व करने पर गर्व है। इसका उद्देश्य समुदाय की विरासत का सम्मान करना और अमेरिका को समृद्ध बनाने में उसकी भूमिका का जश्न मनाना है।
2 जुलाई 1946 से जुड़ा है प्रस्ताव का महत्व
प्रस्ताव में जुलाई को विरासत माह के रूप में मनाने के पीछे ऐतिहासिक वजह भी बताई गई है। यह महीना दो जुलाई 1946 को तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति हैरी एस. ट्रूमैन द्वारा लूस-सेलर अधिनियम पर हस्ताक्षर किए जाने की याद दिलाता है। इस कानून के बाद भारतीय मूल के लोगों के लिए अमेरिकी नागरिकता हासिल करने का रास्ता खुला था।
प्रस्ताव में भारतीय-अमेरिकी समुदाय की धार्मिक और सांस्कृतिक विविधता का भी सम्मान किया गया है। साथ ही, उन पीढ़ियों के योगदान को रेखांकित किया गया है, जिन्होंने अमेरिका के सांस्कृतिक, आर्थिक और नागरिक जीवन को समृद्ध बनाने में भूमिका निभाई है।