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दुनिया में हर 9 में से एक व्यक्ति को रहना पड़ रहा भूखा, भुखमरी बढ़ी

Thu, 16 Jul 2020 02:42 PM IST
आसिम खान वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला

सार

यूएन की ताजा रिपोर्ट कहती है कि:
  • 2019 में 69 करोड़ लोग भुखमरी का शिकार थे
  • 6 साल में यह संख्या करीब 6 करोड़ बढ़ी है
  • 2014 से भुखमरी के आंकड़ों में धीरे-धीरे बढ़ोतरी हुई
  • एक करोड़ लोगों की बढ़ोतरी हुई 2018 की तुलना में
  • 38 करोड़ लगभग लोग एशिया में कुपोषित हैं
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सांकेतिक तस्वीर
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विस्तार
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कोरोना महामारी के कारण लगे लॉकडाउन के बाद से हालात बदतर होते जा रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से लगातार कोरोना वायरस संक्रमण की मॉनिटरिंग की जा रही है, देशों को जानकारियां दी जा रही है जिससे वह अपने को इस महामारी से सुरक्षित रख सकें।

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इस बीच संयुक्त राष्ट्र की पांच एजेंसियों ने एक सर्वे किया है जिसमें से ये बात निकलकर सामने आई है कि दुनिया में हर 9 में से एक आदमी को भूखा रहना पड़ रहा है। इसके अलावा इस साल भुखमरी का शिकार होने वाले लोगों की संख्या में भी इजाफा होगा।

संयुक्त राष्ट्र ने कहा कि पिछले साल भुखमरी के शिकार लोगों की संख्या में इस साल एक करोड़ लोगों का बढ़ावा होगा। चेतावनी दी है कि कोरोना वायरस महामारी इस साल करीब 13 करोड़ अतिरिक्त लोगों को भुखमरी की ओर धकेल सकती है। सोमवार को संयुक्त राष्ट्र की ताजा रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है।
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पांच एजेंसियों ने तैयार की रिपोर्ट
इस रिपोर्ट को यूएन की पांच एजेंसियां खाद्य और कृषि संगठन, अंतर्राष्ट्रीय कृषि विकास कोष, संयुक्त राष्ट्र बाल कोष, विश्व खाद्य कार्यक्रम और विश्व स्वास्थ्य संगठन ने मिलकर तैयार किया है। रिपोर्ट कहती है कि बीते 5 सालों में भुखमरी और कुपोषण के अलग-अलग रूपों के शिकार लोगों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि इस साल महामारी के कारण लगाई पाबंदियां और आर्थिक मंदी से 8 करोड़ से 13 करोड़ लोग भुखमरी का सामना कर सकते हैं। इस रिपोर्ट के लेखकों ने पूर्वी अफ्रीका में ''टिड्डी के प्रकोप" का भी जिक्र किया है।

तीन अरब लोगों के पास सेहतमंद आहार नहीं
यूएन की एजेंसियों का कहना है कि करीब तीन अरब लोगों के पास सेहतमंद आहार सुनिश्चित करने के साधन नहीं हैं। रिपोर्ट कहती है कि इस दिशा में अधिक से अधिक कार्य करने की जरूरत है। उसके मुताबिक, सभी लोगों की पहुंच न केवल भोजन तक होनी चाहिए बल्कि पोष्टिक खाद्य पदार्थों तक भी होनी चाहिए जो एक स्वस्थ आहार बनाते हैं।

रिपोर्ट में निष्कर्ष निकाला गया कि कोरोना वायरस महामारी के परिणाम स्वरूप खाद्य वितरण प्रणाली बाधित हुई, आजीविका को नुकसान हुआ और विदेशों में काम करने वाले अपने घर पैसे भेज नहीं पाए जिस वजह से गरीब परिवारों को स्वस्थ आहार तक पहुंच बनाने में मुश्किल पैदा हुई।

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