संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के मसौदे के अनुसार मनुष्य के दखल के कारण करीब 10 लाख प्रजातियां विलुप्त होने के कगार पर हैं। इस रिपोर्ट में यह उल्लेख किया गया है कि कैसे इंसान ने प्राकृतिक संसाधनों को कमजोर किया जिस पर उनका अस्तित्व निर्भर करता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि स्वच्छ हवा, पेयजल, कार्बन डाइऑक्साइड सोखने वाले जंगल, पराग छिड़कने वाले कीड़े, प्रोटीन संपन्न मछली और तूफान रोकने वाले मैन्ग्रोव में तेजी से आ रही कमी जलवायु परिवर्तन से कम खतरनाक नहीं है। इस रिपोर्ट को छह मई को जारी किया जाना है।
इस रिपोर्ट के अनुसार, निश्चित तौर पर जैव विविधता में कमी और ग्लोबल वार्मिंग का करीबी संबंध है। पेरिस में 130 देशों के प्रतिनिधि 29 अप्रैल को 1,800 से अधिक पृष्ठों की इस रिपोर्ट का आकलन करेंगे।
रिपोर्ट का संकलन करने वाली संयुक्त राष्ट्र की संस्था के अध्यक्ष रॉबर्ट वाटसन ने कहा, "हमें यह समझने की जरूरत है कि जलवायु परिवर्तन और प्रकृति को नुकसान बराबर महत्वपूर्ण हैं ना केवल पर्यावरण के लिए बल्कि विकास और आर्थिक मुद्दों के लिए भी।"
रिपोर्ट में कहा गया है, "पांच लाख से 10 लाख प्रजातियां विलुप्त होने के कगार पर है, जिनमें से कई प्रजातियां दशकों में विलुप्त हो सकती है।"
कई विशेषज्ञों का मानना है कि तथाकथित "व्यापक विलुप्तिकरण" पहले ही शुरू हो चुका है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि आज पृथ्वी में करीब 80 लाख भिन्न प्रजातियों का घर है जिनमें से अधिकतर कीड़े-मकोड़े हैं।