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Kolkata: बॉर्डर के दर्द को बयां करती इटैलियन फिल्म 'इजी लिविंग' की कोलकाता में स्क्रीनिंग

Mon, 14 Nov 2022 05:31 PM IST
Harendra Chaudhary एन. अर्जुन, कोलकाता

सार

यह ऐसी कहानी है, जो इटली और फ्रांस के बीच बॉर्डर बनने के बाद लोगों ने महसूस किया। इसे फिल्म के रूप में पर्दे पर उतारा इटली के दो युवा भाइयों ओरसो मियाकॉवा और पीटर ने। इन दोनों ने जो महसूस किया, उसे बेहतरीन तरीके से पर्दे पर उतारने की कोशिश है, इजी लीविंग...
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EASY LIVING - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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...जब आपको अचानक एक दिन पता चलता है कि अब आपको पड़ोसी दोस्त देश में जाने के लिए कागजात दिखाने होंगे। आप अब सीधे दूसरी ओर नहीं जा पाएंगे। आपसे हजार सवाल-जवाब किए जाएंगे। यह एक बहुत ही परेशान करने वाली घटना है। इससे मन को बहुत ठेस पहुंचती है। इसी दर्द को बयां किया गया है, इटैलियन फिल्म इजी लीविंग में। यह ऐसी कहानी है, जो इटली और फ्रांस के बीच बॉर्डर बनने के बाद लोगों ने महसूस किया। इसे फिल्म के रूप में पर्दे पर उतारा इटली के दो युवा भाइयों ओरसो मियाकॉवा और पीटर ने। इन दोनों ने जो महसूस किया, उसे बेहतरीन तरीके से पर्दे पर उतारने की कोशिश है, इजी लीविंग। अपनी फिल्म के साथ दोनों भाई पहुंचे संस्कृति नगरी कोलकाता, जहां पर उन्होंने सत्यजीत रे फिल्म एवं टेलीविजन इंस्टिट्यूट में इसकी स्क्रीनिंग की।

पर्दे तक यह फिल्म कैसे आई, इसे बताया ओसरो ने जो मोनाको में 1992 में जन्मे, और अपना बचपन इटली के शहर टोरिनो में गुजारी। इसके बाद उच्च शिक्षा हासिल करने अमेरिका चले गए। इस दौरान उन्होंने न्यूयॉर्क फिल्म अकादमी से बीएफए के साथ फिल्म मेकिंग में डिग्री हासिल की। वे बताते हैं कि जब वे छोटे थे तो उनके भाइयों के साथ फ्रांस जाया करते थे। उस दौरान कहीं कोई इटली और फ्रांस में कोई बॉर्डर नहीं था। वे बहुत आसानी से फ्रांस जाया करते और वहां के लोग यहां आया करते। लेकिन फ्रांस में जब आतंकी हमला हुआ, उसके बाद फ्रांस ने अपने सारे बॉर्डर सील कर दिए। वहां पर गार्ड बिठा दिए गए। जब वे पढ़ाई-लिखाई करने के बाद वापस इटली लौटे, तो उनको यह देखकर बहुत दुख हुआ। अब वे आसानी से फ्रांस नहीं जा सकते थे। उनको कागजात दिखाने पड़ते थे।

उनके छोटे भाई पीटर ने कहानी को आगे बढ़ाते हुए कहा, यह बहुत ही दुखी करने वाली घटना थी। मन बड़ा उदास हुआ। अब हम पहले जैसे फ्रांस में प्रवेश नहीं कर सकते थे। कितना अजीब बात है न। एक बॉर्डर ने दोनों देशों के लोगों के मन को न चाहते हुए भी अलग कर दिया। मन में जो दर्द था, उसी को विषय बनाकर हमने फिल्म बनाई और अब तक यह दुनिया की कई फिल्म समारोह में दिखाई जा रही चुकी है। बहुत सराहना हुई है इस फिल्म की। कोलकाता आकर बहुत अच्छा लगा। लोगों को फिल्म बहुत पसंद आई। हम आगे भी कोशिश करेंगे कि भारत में आएं और यहां से भी प्रेरणा लेकर फिल्म बनाएं।

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