बरसात में घरों में सीलन तो होती है, लेकिन गर्मी के मौसम में घरों की दीवारों और फर्श से पानी निकले, यह समझ से परे है। बिलासपुर और ऊना जिले में कई घरों में ऐसा ही देखने को मिल रहा है। इससे जहां लोगों में भय है, वहीं बात प्रशासन की भी समझ से बाहर है। यही नहीं, इस संबंध में जब अमर उजाला ने बिलासपुर जिले के कुछ घरों में पानी निकलने के वीडियो और फोटो रक्षा भू सूचना विज्ञान अनुसंधान प्रतिष्ठान (डीजीआरआई) तत्कालीन सासे को भेजे तो भू विशेषज्ञों ने भी इस पर हैरानी जताई।
अब जांच के लिए इसके वीडियो और फोटो आईआईटी रुड़की के विशेषज्ञों को भेजे हैं। उनसे आग्रह किया जाएगा कि घरों का निरीक्षण कर इसकी सही वजह पता करें। पानी निकलने से परेशान बिलासपुर शहर के लोगों ने जिला उपायुक्त को इस बारे में ज्ञापन भी सौंपा। शुक्रवार देर रात और शनिवार सुबह उपायुक्त बिलासपुर पंकज राय और एसडीएम बिलासपुर सदर सुभाष गौतम ने घरों में जाकर जायजा लिया।
ऋषिकेश से जगदीश शर्मा ने बताया कि उनके घर में वीरवार से पानी आ रहा है। फर्श पर बारिश की बूंदों की तरह सीलन हो रही है। बैरी रजादियां पंचायत के डिग्गर गांव की परमा देवी ने बताया कि उनके घर में भी यही समस्या है। बिलासपुर शहर की सिनेमा कॉलोनी, लखनपुर, कोसरियां, बरठीं, रौड़ा सेक्टर समेत पूरे शहर में यही हाल है। उपायुक्त बिलासपुर ने बताया कि हाइड्रो जियोलॉजिस्टों को जांच के लिए कहा जाएगा।
उधर, ऊना जिला मुख्यालय के साथ लगते कुठार खुर्द, बाथू, पालकवाह, टक्का, रामपुर, पंडोगा, पंजावर और गगरेट क्षेत्र में भी ऐसे मामले सामने आए हैं। यहां विशेषज्ञों के अनुसार यह घटना तापमान में हो रहे बदलाव की वजह से हो रही है। शनिवार को विभिन्न स्थानों पर जल शक्ति विभाग के अधिकारियों ने मौके का जायजा लिया।
बदलता तापमान मुख्य कारण
जल शक्ति विभाग के वरिष्ठ हाइड्रो जियोलॉजिस्ट भवनेश शर्मा ने कहा कि घरों के फर्श और दीवारों से पानी रिसाव का मुख्य कारण बदलता तापमान है। कहा कि जिस प्रकार दिन का तापमान तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन रात के समय तापमान कम रह रहा है, इससे जमीन में नमी रह रही है। दूसरी तरफ घरों में वेंटिलेशन न होने से भी यह समस्या हो रही है। इससे डरने की जरूरत नहीं है।
यह हैरान करने वाला विषय है। अमर उजाला के माध्यम से मिले इसके वीडियो और फोटो आईआईटी रुड़की के विशेषज्ञों को भेजे हैं। उनसे आग्रह किया जाएगा कि वे घरों में आकर इसका निरीक्षण करें, ताकि शोध के बाद इसके कारणों का पता चल सके।
- डॉ. सुनील भारद्वाज, वैज्ञानिक डीजीआरआई