मजदूर अपनी मजदूरी बेचता है और बदले में न्यूनतम मजदूरी भी पाता है। दुर्भाग्य से मजदूरों की भलाई को लेकर दिए जा रहे सरकारी आश्वासन यहां तक कि उनके नाम पर संघर्ष करने का एलान करने वाले भी खानापूर्ति कर अपनी जिम्मेदारी की इतिश्री कर लेते हैं। तो आज इस खास पेशकश ‘मजदूर दिवस’ पर जानेंगे मजदूरों की कहानी उन्हीं की जुबानी।