शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय की आंबडेकर पीठ के अध्यक्ष प्रो. विवेकानंद तिवारी ने कुंभ पर एक साथ पांच पुस्तकें प्रकाशित की हैं। कुंभ और अखाड़ों पर लिखी इन पुस्तकों को प्रकाशित कर सनातन धर्म और परंपरा को आगे बढ़ाने का प्रयास किया है। इन पुस्तकों में सनातन समागम महाकुंभ, महाकुंभ, सामाजिक समरसता, हिंदू समागम, तीर्थराज प्रयाग और महाकुंभ, सनातन धर्म एवं परंपरा के रक्षक अखाड़े, दैवीय शक्ति संपन्न किन्नर और किन्नर अखाड़े शामिल है। प्रो. तिवारी ने किन्नर अखाड़े पर देश में सर्वप्रथम कार्य करने का दावा किया। प्रो. तिवारी की 150 से ज्यादा पुस्तकें और 250 से ज्यादा शोध पत्र प्रकाशित हो चुके हैं। इन्हें कई संस्थाओं ने सम्मानित किया है। इनके इन सम्मानों में भारत भारती सम्मान, मालवीय शिक्षा सम्मान, राष्ट्र गौरव सम्मान, और महाशक्ति, शारदा शताब्दी सम्मान शामिल है। उन्होंने कहा कि कुंभ के आयोजन का उद्देश्य सामूहिक चिंतन था। ऋषि, महर्षि, ब्रह्मर्षि एक समय और स्थान विशेष पर बड़ी संख्या में उपस्थित होकर समाज, राष्ट्र और प्रकृति की समस्याओं पर सामूहिक चिंतन करते थे और चिंतन निष्कर्ष रूपी अमृत से समाज, राष्ट्र और प्रकृति लाभान्वित होती थी। बताया कि उनकी इन पांच पुस्तकों का विमोचन शंकराचार्य, प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, संघ प्रमुख और अनेक राज्यों के राज्यपाल के हाथों करवाया जा चुका है।