दमोह प्रधानमंत्री आवास योजना के बीएलसी घटक योजनांतर्गत किए गए भुगतान संबंधी शिकायतों की जांच के लिए कलेक्टर द्वारा एक जांच समिति बनाई गई है। इस समिति में नगर पालिका परिषद के अधिकारी-कर्मचारियों के साथ-साथ अन्य विभागों के उपयंत्रियों को भी शामिल किया गया है। लेकिन, इस जांच समिति में ऐसे उपयंत्रियों को शामिल किया गया है जो या तो सेवानिवृत्त हो चुके हैं या दमोह से स्थानांतरित हो चुके हैं। ऐसे में गठित की गई समिति पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
दरअसल, नगर पालिका परिषद दमोह में प्रधानमंत्री आवास योजना के बीएलसी घटक अंतर्गत किए गए भुगतान संबंधी अनियमितताओं की शिकायतों पर कलेक्टर ने जांच के आदेश दिए थे। इस जांच के तहत अपर कलेक्टर मीना मसराम ने शहर के 39 वार्डों के लिए कर्मचारियों और अन्य विभागों के उपयंत्रियों को जांच दल में शामिल किया। इन्हें यह प्रमाणित करना था कि प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए जो राशि आवंटित की गई थी, वह पात्र हितग्राहियों को दी गई या अपात्र लोगों को। लेकिन, इस समिति ने अब तक कोई जांच नहीं की है।
कौन-कौन अधिकारी शामिल?
- जेपी पांडे: लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के उपयंत्री, दो वर्ष पूर्व सेवानिवृत्त।
- शेख मोहसिन खान: जनपद पंचायत दमोह के उपयंत्री, डेढ़ वर्ष पूर्व रीवा स्थानांतरित।
- मदन सिंह ठाकुर: लोक निर्माण विभाग के उपयंत्री, दो वर्ष पूर्व सेवानिवृत्त।
- केके अग्रवाल: पीआईयू के उपयंत्री, एक वर्ष पूर्व सागर स्थानांतरित।
- केएस शुक्ला: जल संसाधन विभाग के उपयंत्री, वर्तमान में पन्ना में पदस्थ।
- एचडी शर्मा: जल संसाधन विभाग के उपयंत्री, एक वर्ष पूर्व सेवानिवृत्त।
- केएल पटेल: जनपद पंचायत पटेरा के उपयंत्री, वर्तमान में कटनी में पदस्थ।
- महेंद्र सिंह ठाकुर: ग्रामीण सेवा विभाग के उपयंत्री, एसडीओ प्रभार में।
अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई
प्रधानमंत्री आवास योजना में अनियमितताओं और नियमों का उल्लंघन कर राशि के अन्य कार्यों में भुगतान की शिकायत पर कलेक्टर द्वारा कराई गई जांच में कई अनियमितताएं सामने आई थीं। इसकी रिपोर्ट कार्रवाई के लिए नगरीय प्रशासन विभाग भोपाल को भेजी गई थी, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। सूत्रों के अनुसार, वर्तमान में पदस्थ कुछ अधिकारी और कर्मचारी अपने राजनीतिक प्रभाव के कारण इस जांच को भोपाल में रुकवाने का प्रयास कर रहे हैं।
दस्तावेज उपलब्ध नहीं थे
जांच समिति में तैनात नगर पालिका के कर्मचारियों पर सीएमओ का दबाव है कि वे यह रिपोर्ट दें कि संबंधित हितग्राही पात्र था या अपात्र। कर्मचारियों का कहना है कि जब हितग्राहियों को आवास योजना की राशि आवंटित की गई थी, तब इसकी स्वीकृति किन अधिकारियों ने दी, इसकी जांच होनी चाहिए। कर्मचारियों ने यह भी बताया कि जिन हितग्राहियों को राशि जारी की गई थी, उनके दस्तावेज उपलब्ध नहीं थे।
क्या बोले संबंधित अधिकारी?
- लोक निर्माण विभाग के सेवानिवृत्त उपयंत्री मदन सिंह ठाकुर ने कहा- मैं तो दो वर्ष पूर्व सेवानिवृत्त हो चुका हूं। मुझे कोई जानकारी नहीं है कि किस बात की समिति बनी और किस बात की जांच होनी है। मेरा नाम कैसे आ गया, यह पता नहीं।
- पीआईयू सागर में पदस्थ उपयंत्री केके अग्रवाल ने कहा- मैं एक वर्ष पूर्व सागर स्थानांतरित हो चुका हूं। मुझे किसी भी प्रकार की जांच के आदेश प्राप्त नहीं हुए हैं।
जांच कराई जा रही है
कलेक्टर सुधीर कुमार कोचर ने कहा कि इस मामले में सीएमओ द्वारा जांच कराई जा रही है। जांच रिपोर्ट आने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।