खड़गपुर से भाजपा उम्मीदवार दिलीप घोष ने मतदान के पहले चरण पर कहा, " आज ये लोग 90% वोटिंग के बाद जगह-जगह हिंसा कर रहे हैं। बंगाल में भरपूर वोटिंग हुई है। चुनाव आयोग ने बहुत बड़ा और ऐतिहासिक काम किया है। हम उन्हें धन्यवाद करते हैं.पहले फेज में ही हमें 100 से ज्यादा सीटें मिल गई हैं बाकी हमें बहुत आराम से बहुमत मिलेगी.
दिलीप घोष, जो खड़गपुर से भाजपा उम्मीदवार हैं, ने पश्चिम बंगाल में मतदान के पहले चरण को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है और इसे कई मायनों में महत्वपूर्ण बताया है। उन्होंने कहा कि राज्य में लगभग 90 प्रतिशत तक मतदान होने के बाद भी कुछ स्थानों पर हिंसा की घटनाएं सामने आई हैं, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए चिंता का विषय है। घोष के अनुसार, इतनी बड़ी संख्या में लोगों का मतदान के लिए घरों से निकलना यह दर्शाता है कि जनता में राजनीतिक जागरूकता और बदलाव की इच्छा मजबूत हो चुकी है। उन्होंने इसे “भरपूर वोटिंग” बताते हुए कहा कि यह जनभागीदारी लोकतंत्र की मजबूती का संकेत है।
दिलीप घोष ने आरोप लगाया कि मतदान के दौरान और विशेष रूप से उच्च मतदान प्रतिशत के बाद कुछ क्षेत्रों में जानबूझकर तनाव और हिंसा पैदा करने की कोशिश की गई। हालांकि उन्होंने किसी विशेष दल का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया, लेकिन उनके बयान को राजनीतिक संदर्भ में देखा जा रहा है, जहां भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच लगातार आरोप-प्रत्यारोप का दौर चलता रहा है। उनका कहना था कि इस तरह की घटनाएं चुनावी माहौल को प्रभावित करने का प्रयास हैं, लेकिन इसके बावजूद आम मतदाता ने साहस दिखाते हुए अपने मताधिकार का प्रयोग किया।
उन्होंने Election Commission of India की भूमिका की भी सराहना की और कहा कि आयोग ने इस बार बहुत बड़ा और ऐतिहासिक काम किया है। घोष के अनुसार, सुरक्षा व्यवस्था, केंद्रीय बलों की तैनाती और मतदान प्रक्रिया की निगरानी इस बार पहले की तुलना में अधिक सख्त और व्यवस्थित रही, जिससे अधिक संख्या में लोग बिना भय के मतदान केंद्रों तक पहुंच सके। उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव आयोग की इन व्यवस्थाओं ने चुनाव को अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने में मदद की है।
घोष का मानना है कि उच्च मतदान प्रतिशत और जनता की सक्रिय भागीदारी इस बात का संकेत है कि राज्य में राजनीतिक बदलाव की संभावना प्रबल है। उन्होंने कहा कि जब जनता इतनी बड़ी संख्या में मतदान करती है, तो यह स्पष्ट संदेश होता है कि लोग अपने भविष्य को लेकर गंभीर हैं और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में विश्वास रखते हैं। कुल मिलाकर, उनका यह बयान पश्चिम बंगाल के चुनावी माहौल, हिंसा के आरोपों और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर एक व्यापक दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है, जो आने वाले चुनावी परिणामों को लेकर उत्सुकता भी बढ़ाता है।