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Naxal Free India: नक्सलवाद पर शाह के बयान से गरमाई राजनीति, भड़के विपक्षी नेताओं को मिला ये जवाब!

Wed, 01 Apr 2026 07:00 AM IST
Bhaskar Tiwari वीडियो डेस्क अमर उजाला डॉट कॉम

 भाजपा सांसद जगदम्बिका पाल ने नक्सलवाद पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान पर कहा, "उन्होंने 31 मार्च 2026 का एक लक्ष्य तय किया था. देश के 12 राज्यों में रेड कॉरिडोर बन चुका था। 17% भू-भाग पर ये फैला हुआ था, जिससे 12 करोड़ लोग प्रभावित थे। 20 हजार लोग मारे गए। ऐसी परिस्थितियों में यदि कोई संकल्प ले कि हम नक्सलमुक्त भारत बनाएंगे जो हमने इसे पीएम मोदी के नेतृत्व में तय किया था.इसके परिणाम भी देखने को मिले जहां छत्तीसगढ़ में या झारखंड जैसे राज्यों में आय दिन घटनाएं घटित होती थीं। कितने नेताओं को भी मार दिया जाता था, लोगों को मार दिया जाता था लेकिन आज न केवल उन घटनाओं में कमी आई है बल्कि साल से कोई घटनाएं ही नहीं घटी हैं.देश की आंतरिक सुरक्षा, जिसके सामने नक्सलवाद सबसे बड़ी चुनौती थी, उसे लेकर देश के गृह मंत्री ने जो वादा किया था वो पूरा करके दिखाया है। इससे देश का आम आदमी अब उन राज्यों में, उन आदिवासी इलाकों में विकास देख रहा है

नक्सलवाद जैसे संवेदनशील और लंबे समय से चले आ रहे मुद्दे पर अमित शाह के हालिया बयान के बाद देश की राजनीति गरमा गई है और विपक्षी दलों ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। केंद्रीय गृह मंत्री के रूप में अमित शाह ने अपने बयान में कहा कि सरकार नक्सलवाद को जड़ से खत्म करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और पिछले कुछ वर्षों में इस दिशा में उल्लेखनीय प्रगति भी हुई है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि सरकार की सख्त नीतियों और सुरक्षा बलों की सक्रियता के कारण नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में हिंसा की घटनाओं में कमी आई है। हालांकि, उनके इस बयान को लेकर विपक्षी नेताओं ने सवाल उठाए हैं और इसे जमीनी हकीकत से दूर बताया है।

विपक्ष की ओर से सबसे तीखी प्रतिक्रिया टी.एस. सिंहदेव ने दी, जिन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि देश के गृह मंत्री को केवल अपनी पार्टी के दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि पूरे देश को ध्यान में रखकर बयान देना चाहिए। उनका कहना है कि नक्सलवाद केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह सामाजिक और आर्थिक असमानताओं से जुड़ा हुआ एक जटिल प्रश्न है। सिंहदेव ने यह भी कहा कि यदि सरकार इस समस्या को केवल सुरक्षा बलों के जरिए हल करने की कोशिश करेगी, तो इसका स्थायी समाधान संभव नहीं है। उन्होंने संवाद, विकास और स्थानीय लोगों के विश्वास को जीतने पर जोर दिया।

अन्य विपक्षी नेताओं ने भी सरकार पर आरोप लगाया कि वह नक्सलवाद जैसे गंभीर मुद्दे का राजनीतिकरण कर रही है। उनका कहना है कि इस विषय पर सभी दलों को मिलकर काम करना चाहिए और इसे राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। वहीं, सरकार का पक्ष है कि उसने नक्सल प्रभावित इलाकों में बुनियादी ढांचे, सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार पर भी ध्यान दिया है, जिससे वहां के लोगों का जीवन स्तर बेहतर हो सके।

इस पूरे विवाद ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि नक्सलवाद पर देश में राजनीतिक सहमति की कमी है। जहां सरकार अपनी उपलब्धियों को रेखांकित कर रही है, वहीं विपक्ष अधिक समावेशी और संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की मांग कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि नक्सलवाद जैसी जटिल समस्या का समाधान तभी संभव है, जब सुरक्षा उपायों के साथ-साथ विकास और सामाजिक न्याय को भी समान प्राथमिकता दी जाए और सभी राजनीतिक दल मिलकर इस दिशा में ठोस कदम उठाएं।
 

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