साल 2008 का मालेगांव ब्लास्ट जिसमें 17 साल बाद फैसला आया। दरअसल, मालेगांव विस्फोट के बाद 'भगवा आतंकवाद' सुर्खियों में आया। लेकिन ऐसे में सवाल ये है कि एनआईए कोर्ट ने आरोपियों को बरी कैसे कर दिया.
साल 2008 का मालेगांव ब्लास्ट जिसमें 17 साल बाद फैसला आया। दरअसल, मालेगांव विस्फोट के बाद 'भगवा आतंकवाद' सुर्खियों में आया। विस्फोट में पहले 101 लोगों के घायल होने का दावा किया गया लेकिन एनआईए कोर्ट ने कहा कि विस्फोट में केवल 95 लोग घायल हुए क्योंकि मेडिकल सर्टिफिकेट में कुछ खामियां थीं। प्रज्ञा सिंह ठाकुर, लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित, रिटायर्ड मेजर रमेश उपाध्याय, सुधाकर चतुर्वेदी, अजय राहिरकर, सुधाकर धर द्विवेदी और समीर कुलकर्णी सभी बरी हो गए. अब सवाल है कि कोर्ट में ऐसा क्या हुआ कि सभी आरोपी बरी हो गए. कोर्ट ने जो टिप्पणी की है और जो फैसला दिया है, उससे समझ आ जाएगा. मुकदमे के दौरान, जहां 39 गवाह मुकर गए, वहीं एक महत्वपूर्ण नुकसान कुछ CDs का हुआ जो टूटी हुई पाई गईं. इन सीडी में ठाकुर, पुरोहित और अन्य लोगों की कथित साजिश के दौरान की गई बैठकों के वीडियो फुटेज थे और इन्हें स्वयंभू धर्मगुरु और आरोपी सुधाकरधर द्विवेदी ने गुप्त रूप से रिकॉर्ड किया था. हालांकि, अदालत में ये सीडी पेश किए जाने से पहले ही टूटी पाई गईं और उनकी कॉपी हासिल करने की कोई कोशिश नहीं की गई.