निर्भया की मां आशा देवी ने कहा, "यह एक नया नियम बनाया जा रहा है ऐसा नहीं होना चाहिए.आप 500 किमी दूर हों या घर पर इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। फर्क इससे पड़ता है कि आपने अपराध किया है और आपको सज़ा मिली है.कोर्ट को पीड़ित और उसके साथ जो हुआ, उसे ध्यान में रखते हुए इस पर निष्पक्ष सुनवाई करनी चाहिए। बिल्कुल भी बेल नहीं मिलनी चाहिए.उस परिवार को अभी भी खतरा है.कई बार ऐसा हुआ है कि निचली अदालत और हाई कोर्ट ने पीड़ित को सज़ा दी है, लेकिन फिर उन्हें सुप्रीम कोर्ट से राहत मिल गई.कोर्ट खुद ही मज़ाक बना रहा है कि ऐसा फैसला कैसे लिया जा सकता है
उन्नाव दुष्कर्म मामले (2017) में दोषी और उम्रकैद की सजा काट रहे पूर्व भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को दिल्ली हाई कोर्ट से 23 दिसंबर 2024 को एक बड़ी कानूनी राहत मिली है। अदालत ने सेंगर की उम्रकैद की सजा को उनकी अपील लंबित रहने तक निलंबित (Suspend) कर दिया है और उन्हें सशर्त जमानत दे दी है। यह आदेश जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद और जस्टिस हरीश वैद्यनाथन शंकर की पीठ ने सुनाया। सजा के निलंबन का मुख्य आधार यह था कि सेंगर काफी समय से जेल में हैं और उनकी दोषसिद्धि के खिलाफ दायर मुख्य अपील पर सुनवाई अभी जारी है।
सजा निलंबन के इस फैसले पर पीड़िता और उसके परिवार ने गहरा दुख और डर व्यक्त किया है। पीड़िता ने सुरक्षा का हवाला देते हुए इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने और संसद भवन या इंडिया गेट के पास धरने पर बैठने की बात कही है। उल्लेखनीय है कि कुलदीप सेंगर को 2019 में एक नाबालिग लड़की के अपहरण और बलात्कार का दोषी पाया गया था, जिसके बाद उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी और उनकी विधानसभा सदस्यता भी रद्द कर दी गई थी।