Kolkata के दक्षिणी क्षेत्र तारातला में बुधवार दोपहर एक बड़ा हादसा हुआ, जब निर्माणाधीन गोदाम का शेड अचानक भरभराकर गिर गया। यह दुर्घटना दोपहर लगभग 12:07 बजे Taratala Transport Depot के पास हुई। हादसे के समय निर्माण स्थल पर कई मजदूर और कर्मचारी मौजूद थे, जिनमें से अनेक लोग मलबे के नीचे दब गए। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार इस दुर्घटना में अब तक 5 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि लगभग 20 लोगों को मलबे से सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। बचाए गए लोगों में दो की हालत गंभीर बताई गई है और उन्हें आईसीयू में भर्ती कराया गया है, जबकि अन्य 18 लोगों की स्थिति फिलहाल खतरे से बाहर बताई जा रही है।
हादसे के तुरंत बाद पुलिस, दमकल विभाग, आपदा प्रबंधन दल और स्थानीय प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंचीं और बड़े पैमाने पर राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया गया। मलबे में फंसे लोगों को निकालने के लिए भारी मशीनों और विशेष उपकरणों का उपयोग किया गया। इस दौरान एक स्थानीय युवक की बहादुरी भी सामने आई, जिसने मलबे में दबे एक मजदूर का पैर पहचान लिया और उसे पकड़कर रेस्क्यू टीम को उसकी सही स्थिति के बारे में जानकारी दी। युवक की सूझबूझ और तत्परता के कारण बचावकर्मियों को मजदूर तक पहुंचने में मदद मिली और उसे सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। इस घटना ने संकट की घड़ी में आम नागरिकों की मानवीय संवेदनाओं और साहस का उदाहरण प्रस्तुत किया।
हादसे के बाद निर्माण कार्य की गुणवत्ता, सुरक्षा मानकों और जिम्मेदार व्यक्तियों की भूमिका को लेकर सवाल उठने लगे हैं। इसी बीच Kalyan Banerjee ने इस दुर्घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि तारातला में जो घटना हुई है वह अत्यंत दुखद और चिंताजनक है। साथ ही उन्होंने मांग की कि मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यह पता लगाया जाना चाहिए कि इस दुर्घटना के लिए कौन-कौन जिम्मेदार है। उन्होंने यह भी कहा कि जांच के दौरान केवल किसी एक समूह या संस्था को निशाना बनाने के बजाय उन सभी लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए जिनकी लापरवाही या भूमिका इस हादसे में सामने आती है।
फिलहाल प्रशासन ने दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है। विशेषज्ञों द्वारा यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि शेड गिरने के पीछे निर्माण संबंधी खामी, तकनीकी त्रुटि, सुरक्षा मानकों की अनदेखी या किसी अन्य प्रकार की लापरवाही जिम्मेदार थी। इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर निर्माण स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।