कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के हालिया आरोपों और अपीलों ने भारतीय राजनीति में एक नई बहस को जन्म दे दिया है। राहुल गांधी ने कुछ दिन पहले चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा था कि देश में व्यवस्थित रूप से "वोट चोरी" की जा रही है और युवाओं से आह्वान किया था कि वे इस प्रक्रिया को रोकने के लिए आगे आएं। उन्होंने दावा किया कि लोकतंत्र और संविधान की रक्षा अब युवाओं, खासकर छात्रों और जेन जी (Gen Z) पीढ़ी की जिम्मेदारी है।
राहुल गांधी का कहना था कि कर्नाटक के कालाबुरगी जिले की आलंद विधानसभा सीट पर हजारों वोटरों के नाम बिना किसी उचित कारण के वोटर लिस्ट से हटा दिए गए हैं। इस मामले की जांच कर्नाटक की सीआईडी फरवरी 2023 से कर रही है। लेकिन, राहुल का आरोप है कि चुनाव आयोग इस जांच में सहयोग नहीं कर रहा है। उन्होंने कहा कि आयोग ने जो दस्तावेज सीआईडी को उपलब्ध कराए, वे अधूरे थे, जिससे जांच की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। राहुल गांधी ने यहां तक कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर "वोट चोरों" को बचाने का आरोप है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि एक हफ्ते के भीतर आयोग ने पूरी जानकारी नहीं दी, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे।
यह बयान आते ही भाजपा की ओर से तीखा पलटवार हुआ। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राहुल गांधी पर करारा हमला बोलते हुए कहा कि उनकी अपील का युवाओं पर कोई असर नहीं पड़ेगा। फडणवीस ने राहुल के अंदाज़ और बयानबाज़ी पर तंज कसते हुए कहा कि आज का युवा, खासकर जेन जी, राहुल गांधी में कोई दिलचस्पी नहीं रखता। उनका कहना था कि "आज की पीढ़ी अलग सोचती है। उनके पास समय नहीं है कि वे केवल प्रदर्शन करें या खोखले नारों के पीछे भागें। वे वास्तविकता और ठोस कामकाज को महत्व देते हैं।"फडणवीस ने यहां तक कहा कि राहुल गांधी जनता को सरकार गिराने के लिए तैयार नहीं कर पा रहे हैं, इसलिए अब वे युवाओं को बहकाने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन, उनकी यह रणनीति सफल नहीं होगी। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि "जो नेपाल से प्यार करता है, वह वहीं रह सकता है।" इस बयान से उन्होंने राहुल गांधी पर अप्रत्यक्ष हमला बोला और यह जताने की कोशिश की कि राहुल जनता के मुद्दों को उठाने की बजाय गैर-जरूरी बातें कर रहे हैं।