शरद पवार जैसे राजनीति के चाणक्य को केजरीवाल के नाम पर विचार करना पड़ेगा जो इस वक्त नीतीश कुमार को आगे रखकर मोर्चा बनाने की फिराक में है और नीतीश और शरद पवार ही है जो इस वक्त कांग्रेस को केंद्र में रखना चाहते हैं या यूं कहे कि कांग्रेस के बिना मोर्चा नहीं बनाना चाहते। सबसे अहम सवाल ये यह कि क्या 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी 2014 और 2019 वाला करिश्मा दोहरा पाएंगे। विपक्ष तो यही मान रहा था कि मोदी का जादू अब फीका पड़ गया होगा। आखिर वो कौन सी चुनतियां हैं जो भारतीय जनता पार्टी को 2024 में प्रचंड बहुमत प्राप्त करने के रास्ते में सबसे सबसे बड़ी बाधाएं बनेंगी?