माता सती के जहां पर अंग गिरे वहां पर बने देवी शक्तिपीठ
नैना देवी में मां की आंखें और ज्वालाजी में गिरी माता की जीभ
संवाद न्यूज एजेंसी
बरोटीवाला (सोलन)। सूरजपुर पंचायत के गोशाला श्रीकन्हैया गोधाम परिसर दामुवाला में श्रीमद्भागवत कथा में भगवान शिव और सती की कथा सुनाई गई। कथावाचक प्रकाश चंद शैल ने बताया कि सती माता के पिता राजा दक्ष ने घर में यज्ञ का आयोजन किया। लेकिन उन्होंने अपनी बेटी सती और दामाद शिव भगवान को नहीं बुलाया। जब चंद्रमा व अन्य देवता दक्ष के घर जाने लगे तो उन्हें रास्ते में सती माता मिली।
उन्होंने सती माता से पूछा कि क्या वह अपने पिता के इस समारोह में नहीं जा रही हैं। उन्होंने जाकर भोले नाथ से कहा कि वह भी अपने पिता के घर में हो रहे यज्ञ में जाना चाहती है। भगवान शिव में माता सती को समझाया कि उन्होंने जब हमें बुलावा नहीं दिया है तो वह कैसे जा सकते हैं। माता सती जिद कर बिना शिव की आज्ञा से यज्ञ में चली गईं। वहां पर जब माता सती गई तो किसी ने उनका आदर नहीं किया। इसके बाद उन्होंने यज्ञ में कूद कर अपनी जान दे दी। बाद में शिव भगवान माता के मृत शरीर को कंधे पर उठा कर चले तो उनके अंग हिमाचल में गिरा दिए। जिन स्थानों पर माता के अंग गिरे वहां पर वर्तमान में देवी के शक्ति पीठ बने हैं।