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Digital Review: ना नामी सितारे, ना तकनीक का ताना बाना, फिर भी हिट है ये देसी छोरा

Mon, 14 Jan 2019 05:49 PM IST
विजय जैन एंटरटेनमेंट डेस्क/ अमर उजाला डॉट कॉम
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bollywood - फोटो : self
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हॉलीवुड की नकल करने वालों के लिए यू ट्यूब क्रिएटर एल्विश यादव का चैनल एक सबक भी है और एक नजीर भी। ये चैनल उन लोगों के लिए भी सबक है जिनको लगता है कि ढेर सारे स्पेशल इफेक्ट्स, विदेशी लोकेशन्स और हर दूसरे सीन में महिला किरदारों के कपड़े उतार देने या उनसे गालियां दिलवा देने से ही डिजिटल पर कामयाबी मिल सकती है।
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एल्विश यादव के यूट्यूब चैनल के करीब 38 लाख फॉलोअर्स हैं। 22 साल का ये बंदा सिर्फ देसी बातें करता है। वह भी ठेठ हरियाणवी में जो पश्चिम उत्तर प्रदेश की बोली के भी काफी करीब है। न हाई फाई कैमरे, न एडिटिंग में कोई कलाकारी और न ही कोई नामी एक्टर। बस एल्विश खुद हैं। तीन चार दोस्त हैं। और, एक है सीधी सी कहानी जो दिल को चुभती है, कचोटती है और आखिर में मुस्कान दे जाती है।

कहानी तीन दोस्तों से शुरू होती है। दो लड़के, एक लड़की। तीनों मिलकर अपने ग्रुप के चौथे साथी का इंतजार कर रहे हैं। चौथा आता है पांचवीं के साथ। फिर कुछ दिल जलाने की बातें हैं। कुछ परदेस से आई सौगातें हैं और है जगरातों की तरफ जाती कहानी। लेकिन, वहां तक कहानी जाती नहीं है।
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तकनीकी तौर से देखें तो फिल्म बहुत शौकिया तौर के तकनीशियनों की मेहनत लगती है। रिंग पहनाने से पहले ही हीरोइन के हाथ में रिंग दिखती है। आईस्क्रीम काउंटर पर ही छूट जाती है। बड़ी फिल्मों में इसे कॉन्टीन्यूटी ब्रेक कहते हैं लेकिन यहां इस पर ध्यान देर तक रुकता नहीं हैं। डिजिटल में कंटेंट ही किंग है। और, इसी लिए ये फिल्म भी हिट है।
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