बिहार में सिवान की मिंता देवी अचानक चर्चा में आ गई, क्योंकि कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी मिंता देवी की तस्वीर लगी टीशर्ट पहनकर दिल्ली में प्रदर्शन करते दिखी। इस दौरान कांग्रेस नेताओं ने मिंता देवी को फर्जी वोटर करार देते हुए चुनाव आयोग के द्वारा किये जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया पर जमकर हंगामा किया। अब जब इस बात की जानकारी मिंता देवी तक पहुंची तो वह भड़क गई। उन्होंने कहा कि प्रियंका गांधी या राहुल गांधी मेरे कौन हैं उन्हें मेरी तस्वीर वाली टीशर्ट पहनने का अधिकार किसने दिया. मिंता देवी से पूछने पर वह भड़कते हुए बोली कि मुझे इसके बारे में दो चार दिन पहले पता चला। वह मेरी कौन हैं प्रियंका गांधी या राहुल गांधी मेरे कौन हैं उन्हें मेरी तस्वीर वाली टी शर्ट पहनने का अधिकार किसने दिया? मिंता देवी से यह पूछने पर कि आपको किसी प्रशासनिक अधिकारी की तरफ से कोई कॉल भी आया तो मिंता देवी ने कहा कि मुझे किसी का फोन नहीं आया वे मेरी उम्र से अधिक मेरे शुभचिंतक क्यों बन रहे हैं मिंता देवी ने कहा कि ऐसा नहीं होना चाहिए। मिंता देवी भड़कते हुए बोली कि जिन्होंने भी यह डिटेल्स डाला है, क्या उन्होंने उस समय अपनी आंखें बंद कर ली थी अगर सरकार की नजर में मैं 124 साल की हूँ, तो सरकार मुझे वृद्धावस्था पेंशन क्यों नहीं दे रही है मिंता देवी का कहना है कि 124 वर्ष के उम्र वालों को जो सरकार की योजनायें मिलनी चाहिए वह सरकार मुझे उस योजनाओं का लाभ दे या फिर वोटर आई कार्ड में मेरा डिटेल्स सही किये जाएं। दरअसल, निर्वाचन आयोग की ओर से जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची में सीवान जिले के हसनपुर थाना क्षेत्र निवासी मिंता देवी की उम्र 124 साल दिखाई गई। ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में सुधार की प्रक्रिया के लिए अगस्त का पूरा महीना देते हुए राजनीतिक दलों और आम मतदाताओं से दावा-आपत्ति की मांग की गई है। अबतक किसी राजनीतिक दल ने कहीं एक भी लिखित आपत्ति दर्ज नहीं कराई है। मौखिक आपत्तियों का सिलसिला प्रदर्शन के रूप में चल रहा है। इसी सिलसिले में सीवान के सिसवा कला अर्जनिया गांव निवासी मिंता देवी अचानक सुर्खियों में आ गईं। कांग्रेस नेताओं के साथ प्रियंका गांधी ने दिल्ली में प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन में सभी ने मिंता देवी की तस्वीर वाली टीशर्ट पहन रखी है। कांग्रेस सांसदों ने मिंता देवी को फर्जी वोटर करार दिया। इसे वोट चोरी और हेरफेरी का मामला बताते हुए चुनाव आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण को साजिश करार दिया।
मामला बिहार के सीवान का था। 'अमर उजाला' की टीम ने मौके पर जाकर पड़ता की कि 124 वर्ष की महिला जीवित है या नहीं? वोटर लिस्ट फर्जी है या नहीं? मतदाता सूची के हिसाब से बूथ का पता लगाकर उस वोटर तक पहुंचने का प्रयास किया गया। सबसे पहले उनके ससुर से मुलाकात हुई। वह खुद ही अधेड़ हैं। जाहिर तौर पर उनकी बहू तो कम उम्र होंगी ही। वोटर कार्ड निकाला। मिंता देवी से मुलाकात कराई। पुराने वोटर कार्ड में 1990 की जन्मतिथि थी। वह मायके, छपरा का था। आधार कार्ड में 1990 ही है। ऐसे में 'अमर उजाला' ने समझने का प्रयास किया कि गलती हुई कहां है? क्या विशेष गहन पुनरीक्षण में? तो जवाब मिला ससुराल में जब मतदाता का ट्रांसफर कराया गया तो जब वोटर कार्ड बना, उसमें मिंता देवी की जन्मतिथि 1900 है। इस हिसाब से वह 2024 में 124 साल की दिखाई जा रही होंगी और निश्चित तौर पर लोकसभा चुनाव के समय भी यही उम्र मतदाता सूची में थी। अब पुनरीक्षण में सुधार क्यों नहीं हुआ? इस सवाल का जवाब भी मिला। दरअसल, 'अमर उजाला' ने विशेष गहन पुनरीक्षण के समय सबसे पहले यह खुलासा किया था कि बीएलओ बगैर निरीक्षण किए ही फॉर्म खुद साइन कर रहे हैं। इस केस में भी यही हुआ था। ससुर से बातचीत में बताया कि हमारे यहां कोई फॉर्म भरने नहीं आया था। एक जगह गांव में बीएलओ कहीं बैठ गया था और पुराने कागज पर ही जो मर्जी, भरता चला गया।