समय पर बारिश और बर्फबारी नहीं होने से रवाईं घाटी के सेब उत्पादक मायूस हैं।
जनवरी बीतने को है, लेकिन सेब के बागीचे सूखे पड़े हैं। सेब काश्तकार न तो दवाओं का छिड़काव कर पा रहे हैं और न ही सेब की नई पौध लगा पा रहे हैं।
सेब के पेड़ों की न्यूनतम अवशीतन (नमी) आवश्यकता पूरी नहीं होने से इस बार सेब की फसल चौपट होने का खतरा मंडराने लगा है।
सेब उत्पादन के लिए मशहूर स्योरी फल पट्टी के सेब किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें हैं।
इस बार बर्फबारी नहीं होने से सेब की न्यूनतम अवशीतन आवश्यकता पूरी नहीं हो पा रही है।
सेब की अच्छी फसल के लिए सर्दियों में 1200 से 1600 घंटे तक सात डिग्री सेल्सियस से कम तापमान होना जरूरी है।
बारिश नहीं होने से जमीन से नमी गायब है, जिससे किसान सेब के पेड़ों पर दवाओं का छिड़काव नहीं कर पा रहे हैं।
सेब की नई पौधों का रोपण भी नहीं हो पाया है। बीते सालों में भी इस तरह की स्थिति पैदा होने पर सेब उत्पादन में भारी गिरावट दर्ज की गई थी।
स्योरी फल पट्टी से जुड़े बिंग्सी, मटियाली, नैणी, किम्मी, पिसाऊं, रस्टाड़ी, कंडाऊं, क्वाड़ी, धारी, नौगांव, कोटियाल गांव, सुनारा, मुंगरा, मुराड़ी आदि गांवों के करीब डेढ़ हजार किसानों की आजीविका मुख्य रूप से सेब उत्पादन पर ही टिकी है।
मौसम की बेरुखी के बावजूद किसान सेब के पेड़ों की कटाई-छंटाई और पेड़ों की थाल तैयार करने में जुटे हैं।
सेब किसान गजेंद्र नौटियाल, राकेश शारदा, चंदन रावत आदि का कहना है कि यदि शीघ्र बारिश एवं बर्फबारी नहीं हुई, तो सेब की फसल चौपट हो जाएगी।
कोट.........
इस बार समय पर बारिश एवं बर्फबारी नहीं होना चिंता का विषय है।
जमीन में नमी के लिए अभी तक एक बार बर्फ पड़नी जरूरी थी।
मौसम में आए इस बदलाव से सेब की न्यूनतम अवशीतन आवश्यकता पूरी नहीं हो पाएगी।
सेब की फसल को ज्यादा नुकसान से बचाने के लिए एक हफ्ते के भीतर बारिश और बर्फबारी जरूरी है।
नरेंद्र यादव, जिला उद्यान अधिकारी उत्तरकाशी।