अगस्त 2012 की आपदा में झूला पुल बहने के कारण अलग-थलग पड़े अठाली गांव की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। आजकल भागीरथी नदी में पानी कम होने पर नदी पर लकड़ी डालकर लोग आवाजाही कर रहे थे, लेकिन बीते दिनों जोशियाड़ा बैराज जलाशय से पानी छोड़ने पर वह बह गई। यहां निर्माणाधीन झूला पुल और मोटर पुल अभी तक तैयार नहीं होने के कारण ग्रामीण ट्राली के सहारे जोखिम भरी आवाजाही करने को मजबूर हैं।
बता दें कि अगस्त 2012 की बाढ़ में अठाली गांव को गंगोत्री हाईवे से जोड़ने वाला झूला पुल बह गया था। सरकार ने यहां एक झूला पुल और एक मोटर पुल स्वीकृत तो किया, लेकिन अभी तक इनमें से एक भी पुल तैयार नहीं हो पाया है। यहां लगाई गई ट्राली के तार खींचना भारी मशक्कत का काम है।
प्रशासन ने ट्राली खींचने के लिए कर्मचारियों की व्यवस्था करने की बात कही थी, लेकिन मौके पर कोई कर्मचारी नहीं होने से ग्रामीण स्वयं ही तार खींचकर नदी पार करने को मजबूर हैं, जिससे स्कूली बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों और मरीजों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
सर्दियों में भागीरथी नदी में पानी कम होने पर ग्रामीणों ने नदी पर लकड़ी डालकर आवाजाही की अस्थाई व्यवस्था की थी, लेकिन वह भी बीते दिनों जोशियाड़ा बैराज जलाशय से पानी छोड़ने के कारण बह गई।
रविवार को अठाली गांव निवासी शरद राणा के बेटे राजवीर की बारात जसपुर सिल्याण गई। पूरी बारात को बमुश्किल ट्राली के सहारे नदी पार करनी पड़ी। पूर्व प्रधान मंगल सिंह ने बताया कि आजकल बोर्ड परीक्षा के लिए बच्चों को गढ़ बरसाली इंटर कालेज जाना पड़ता है।
उन्हें ट्राली से नदी पार कराने के लिए अभिभावकों को छोड़ने और लेने के लिए आना पड़ता है। उन्होंने प्रशासन से ट्राली खींचने के लिए कर्मचारियों की व्यवस्था करने तथा पुलों का शीघ्र निर्माण कराने की मांग की है।
क्षेत्रवासी लोकेंद्र बिष्ट ने कहा कि सरकार आपदा के साढ़े तीन साल बाद भी बाढ़ में बही व्यवस्थाओं का पुनर्निर्माण नहीं करा पाई है, जिससे आपदा प्रभावितों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं।