उत्तरकाशी। भटवाड़ी ब्लॉक का मस्ताड़ी गांव वर्षों से भूधंसाव की मार झेल रहा है, लेकिन ग्रामीणों की दुश्वारियां कम होने के बजाय लगातार बढ़ती जा रही हैं। गांव को मुस्टिकसौड़ सड़क से जोड़ने वाला पैदल मार्ग जगह-जगह क्षतिग्रस्त होने से ग्रामीण जान जोखिम में डालकर आवाजाही करने को मजबूर हैं। यही रास्ता चारा चुगान के लिए पशुओं की आवाजाही का भी प्रमुख जरिया है, जिससे हादसे का खतरा बना हुआ है। मस्ताड़ी के पूर्व प्रधान सत्यनारायण सेमवाल ने बताया कि भूधंसाव के कारण गांव में लगातार खतरा बढ़ रहा है और ग्रामीण लंबे समय से विस्थापन की मांग कर रहे हैं। इसके बावजूद आपदा प्रभावित गांव तक पहुंचने वाला रास्ता तक सुरक्षित नहीं कराया जा सका। ग्रामीणों का आरोप है कि जिला योजना और आपदा मद से रास्ते के निर्माण के लिए बजट की मांग कई बार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के सामने रखी गई, लेकिन रास्ते के लिए धन नहीं होने का हवाला दिया जाता रहा। हैरानी यह है कि जिला योजना में निजी प्रकृति की योजनाओं के लिए बजट उपलब्ध है, मगर आपदा प्रभावित ग्रामीणों की मूलभूत जरूरत पर प्रशासन हाथ खड़े कर रहा है। ग्रामीणों ने वर्षों पहले श्रमदान से पैदल और दोपहिया वाहनों की आवाजाही लायक रास्ता तैयार किया था। अब वही रास्ता बदहाल है और प्रशासन की चुप्पी सवाल खड़े कर रही है।