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तस्करों के बढ़ते हौसले चिंता का कारण

Thu, 07 Apr 2016 09:46 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला उत्तरकाशी
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वन्य जीव एवं नशे की तस्करी के लिए कुख्यात होते जा रहे जिले में तस्करों के हौसले इस कदर बुलंद हैं कि वे पुलिस पर हमला करने से भी नहीं घबरा रहे हैं। बीती रात गाजणा क्षेत्र में एसटीएफ के एक जवान की मौत से पहले भी वर्ष 2012 में चिन्यालीसौड़ के चोपडाली क्षेत्र में तस्करों की धरपकड़ के लिए पहुंची पुलिस की टीम पर हमला हो चुका है। जून 2011 में तो तस्कर पुरोला से पुलिस का ही अपहरण कर ले गए थे।
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वर्ष 2011-12 में तत्कालीन एसपी सदानंद दाते द्वारा गठित एसओजी की टीम ने एक साल के भीतर ही एक दर्जन से अधिक गुलदार की खाल तथा भालू का पित्त एवं कस्तूरी के साथ दस तस्कर दबोचे थे। इन घटनाओं से स्पष्ट हो गया था कि जिले में वन्य जीव तस्करों का बड़ा रैकेट सक्रिय है, लेकिन इसके बाद से पुलिस ने इस दिशा में सक्रियता नहीं दिखाई।

फरवरी 2012 में चिन्यालीसौड़ से लगे चोपडाली में तस्करों की धरपकड़ के दौरान भी पुलिस टीम पर हमला हुआ था। तब तस्करों की शह पर ग्रामीणों ने पुलिस टीम को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा था, जिसमें पुलिस का एक एसआई और छह जवान घायल हुए थे।
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हालांकि बाद में पुलिस ने हमलावरों और तस्करों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की थी। इसके अलावा जून 2011 में नौगांव पुरोला पुलिस त्यूणी से एक तस्कर को पकड़ कर लाई थी। तब भी गाड़ी में भरकर आए तस्करों के समर्थक पुरोला भरे बाजार से पुलिस के जवानों का अपहरण कर ले गए थे और बुरी तरह पिटाई कर छोड़ा था।

छोटे लालच में तस्करों का साथ दे रहे ग्रामीण
उत्तरकाशी। जानकारों की मानें तो तस्करों ने सीमांत जनपद के दूरस्थ गांवों तक अपना नेटवर्क फैलाया हुआ है। ग्रामीण छोटे लालच में तस्करों को वन्य जीव अंग और अफीम, चरस आदि नशीले पदार्थ मुहैया कराते हैं। बड़े तस्कर नेटवर्क ग्रामीणों से अवैध सामान सुरक्षित स्थानों तक मंगाकर आगे करोड़ों कमाते हैं। जबकि इस बीच पकड़े जाने पर सजा स्थानीय ग्रामीणों को ही भुगतनी पड़ती है। तस्करी को आसान बनाने के लिए पंजाब, हरियाणा, उत्तरप्रदेश आदि बाहरी राज्यों के लोग यहां दूरस्थ गांवों से बेटियां तक ब्याह कर ले जा रहे हैं।
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वर्ष 2011-12 में पकड़ गए वन्य जीव तस्करी के मामले
1-11 जनवरी 2011 को वन विभाग ने गुलदार की एक खाल के साथ एक तस्कर दबोचा।
2-मार्च 2011 में गोविंद पशु विहार में गुलदार की एक तथा टौंस वन प्रभाग में दो खालें पकड़ी गईं।
3-18 जून 2011 को पुलिस की एसओजी टीम ने गुलदार की तीन खाल सहित दो तस्कर दबोचे।
4-27 अगस्त 2011 को पुलिस की एसओजी टीम ने गुलदार की एक खाल के साथ एक तस्कर पकड़ा।
5-29 सितंबर 2011 को पुलिस की एसओजी टीम ने गुलदार की दो खाल, भालू के पित्त व कस्तूरी के साथ एक तस्कर दबोचा।
6-25 अक्तूबर 2011 को गोविंद पशु विहार में गुलदार की एक खाल के साथ एक तस्कर गिरफ्तार।
7-27 नवंबर 2011 को पुलिस टीम ने गुलदार की एक खाल व भालू के पित्त के साथ एक तस्कर को गिरफ्तार किया।
8-23 फरवरी 2012 को एसओजी की टीम ने गुलदार की तीन खालों के साथ एक तस्कर को गिरफ्तार किया था।
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