अगोड़ा के मान सिंह, सुरेश पंवार, विश्व प्रकृति निधि के रिसर्च स्कालर खिमानंद बलोदी एवं मीनल कहते हैं कि लोगाें के पास 15 सितंबर तक का चावल है। अन्य जरूरत का कुछ सामान बीच में मौसम मेहरबान होने पर लोगों ने उत्तरकाशी आकर तथा कुछ संस्थाओं से जुटा लिया है। गांव के संपर्क मार्ग बहाल होने जरूरी है। रास्ते सितंबर पहले सप्ताह तक नहीं खुले तो क्षेत्रवासियों के साथ गूजरों के पास खाद्यान्न नहीं बचेगा।