काशीपुर। मैक्सिको का एवोकैडो मक्खन फल अब उद्यान किसानों का आय बढ़ाएगा। रविवार को एक कंपनी के प्रतिनिधियों के साथ क्षेत्र के उद्यानियों की बैठक में इस फल की विशेषता पर चर्चा हुई। बताया गया कि किसान इस फल की खेती कर अपनी आय को बढ़ा सकते हैं।
चैती चौराहा स्थित एक होटल सभागार में उद्यान किसानों की बैठक कुमाऊं के बागान समिति संगठन के बैनर तले हुई। समिति के सचिव स्वेतांशु चतुर्वेदी ने कहा कि इस साल बैमौसम बारिश से बागों में चैपा बीमारी काफी लगी है। सभी ने अमरूद के बाग लगा रखे हैं। इस समय अमरूद की मांग कम हो गई है। अरुण भक्कू ने कहा कि जिस फल की देश और विदेश में मांग हो उसे उगाना चाहिए।
गणेश बाबर ने बताया कि एवोकैडो फल बागानों के लिए लाभदायक है। बैठक में समिति के अध्यक्ष दीप बेलवाल, प्रदीप सरकार, योगेश जिंदल, मदन मोहन जिंदल, समरपाल सिंह ग्रेवाल, प्रदीप सरकार, राहुल प्रकाश आदि मौजूद रहे।
एवोकैडो मक्खन फल की विशेषता
-तराई-भावर की जलवायु इसके लिए अनुकूल है।
-इसका पौधा अमरूद के पौधे के बराबर ऊंचा होता है और उतने ही जगह में फलता-फूलता है।
-एक एकड़ में 200 पौधे लगते हैं। एक पेड़ में लगभग 75 किलो फल आते हैं।
-यह फल स्वादहोन होता है इसलिए इसे मक्खन फल भी कहते हैं।
-यह शुगर के मरीजों काफी लाभदायक होता है।
-फल खाने के बाद इसकी गुठली और छिलका बिक जाते हैं।
-हरे रंग के इस फल में गूदा बहुत ज्यादा होता है। लोग इसे ब्रेड पर लगाकर भी खाते हैं।
-फल में एक और खासियत है कि यह पेड़ से तोड़े जाने के एक महीने बाद भी खराब नहीं होता है।
-यह पेड़ पर चार महीने तक ताजा रहता है। इसे फ्रीज में रखने की भी जरूरत नहीं होती है।
-फूल आने के चार महीने बाद फल तैयार हो जाता है।
-मैक्सिको, अमेरिका, साउथ अफ्रीका सहित सौ से ज्यादा देशों में इसे बहुत पसंद किया जाता है।