पंतनगर। कृषि महाविद्यालय स्थित डाॅ. बीबी सिंह सभागार में पंतनगर काव्य महोत्सव और सम्मान समारोह में खुशी का माहौल उस वक्त गमगीन हो गया जब वीर रस की कविता सुनाते-सुनाते पंतनगर के कवि सुभाष चतुर्वेदी (70) लड़खड़ाकर जमीन पर गिरे और फिर उठ न सके। दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया। सोमवार को मथुरा में उनका अंतिम संस्कार किया गया।
रविवार को राष्ट्रीय स्वयं सुरक्षा अभियान की ओर से भारतीय वीर जवानों के सम्मान में पंतनगर काव्य महोत्सव आयोजित किया गया था। सम्मेलन में विभिन्न कवियों के बाद कवि सुभाष चतुर्वेदी ने कविता पाठ करना शुरू किया। उन्होंने कविता सुनाई कि समय सीमा है, सीमा के प्रहरियों को करना है प्रणाम और समय सीमा में ही सनातन का करना है गुणगान...। काव्य पाठ करते हुए उनकी आवाज बैठती चली गई और वे मंच पर ही गिर पड़े। आननफानन आयोजकों और परिचितों ने उन्हें विवि चिकित्सालय पहुंचाया, जहां से उनको जिला चिकित्सालय रुद्रपुर रेफर कर दिया गया। यहां चिकित्सकों ने दिल का दौरा पड़ने से उनकी मौत की सूचना दी। उनका एक बेटा और एक बेटी है।
पंतनगर। बचपन से धार्मिक प्रवृत्ति के सुभाष चतुर्वेदी को 1974 में पंतनगर विवि में सहायक लेखाकार के पद पर नियुक्ति मिली थी। वर्ष 2014 में वह विवि के नियंत्रक कार्यालय में लेखाकार पद से सेवानिवृत्त होकर जवाहर नगर में बस गए थे। उनको काव्य पाठ का बेहद शौक था। इसके चलते वह विवि परिसर सहित आसपास के कवि सम्मेलनों में भाग लिया करते थे। वह विश्व हिंदू परिषद के सक्रिय कार्यकर्ता और परिसर में स्टेट बैंक के पीछे बृजवासी कैंटीन का संचालन करते थे। राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान वह जेल भी गए थे और हाल ही में संपन्न प्राण प्रतिष्ठा के दिन उन्होंने झा काॅलोनी मंदिर में लड्डू बंटवाए और भंडारे का आयोजन भी किया था।