रुद्रपुर। स्वास्थ्य विभाग के सेवानिवृत्त निदेशक डॉ. एलएम उप्रेती राममंदिर आंदोलन में प्रत्यक्ष रूप से शामिल नहीं रहे लेकिन सरकारी कार्मिक के रूप में वे आंदोलन के अगुवा रहे। चर्चित नेताओं से कई दफा रूबरू हुए। राम मंदिर आंदोलन में गिरफ्तार उमा भारती ने उनको खून की जांच के लिए सैंपल देने से इन्कार कर दिया था।
छह साल पहले विभाग से सेवानिवृत्त डॉ. उप्रेती बताते हैं कि छह दिसंबर 1992 को उनकी नियुक्ति ललितपुर के जिला अस्पताल में पैथोलॉजिस्ट पद पर थी। रात करीब 10 बजे उनको माता टीला जाने का आदेश मिला था। ललितपुर से करीब 50 किमी दूर बेतवा नदी के किनारे सिंचाई विभाग के गेस्ट हाउस को अस्थायी जेल बनाया गया था। प्रशासन की ओर से उपलब्ध कराए वाहन से वह पुलिस प्रशासन के साथ रात 12 बजे वहां पहुंचे। पूरा गेस्ट हाउस छावनी में तब्दील था। अगली सुबह होते लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती, विनय कटियार, अशोक सिंघल सहित कई अन्य नेताओं को वाहनों से लाया गया। जांच के लिए सभी के खून का सैंपल लेने थे। उमा भारती को छोड़कर सभी ने अपना सैंपल आसानी से दिया था।
उमा ने हंसते हुए कहा था कि उनका ब्लड ग्रुप ओ नेगेटिव है। खुद को स्वस्थ बताकर उन्होंने खून का सैंपल देने से इन्कार कर दिया। उनको सुई की चुभन से डर लग रहा था। शायद पहली उन्होंने ही उमा भारती के खून का सैंपल जांच के लिए लिया था। उनका ग्रुप की याद तो नहीं, मगर वो ओ नेगेटिव नहीं था। इसके बाद उन्होंने स्वीकारा था कि उनका ब्लड टेस्ट पहले कभी नहीं हुआ था। डॉ. उप्रेती बताते हैं कि राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा होने से लोग बेहद उत्साहित हैं। वे भी 26 जनवरी को अयोध्या जाकर रामलला के दर्शन करेंगे।