रुद्रपुर। राजकीय प्राथमिक विद्यालय भदईपुरा में पर्यावरण मित्र ना होने के कारण शौचालयों से दुर्गंध उठ रही है। यहां सीएसआर से मिले शौचालयों में पानी की व्यवस्था ना होने के कारण ताले लटके हुए हैं। छात्र-छात्राओं के लिए सामूहिक शौचालय खुले हैं, जो साफ-सफाई के अभाव में संक्रमण का खतरा बने हुए हैं।
संवाद न्यूज एजेंसी की टीम ने बृहस्पतिवार को भदईपुरा प्राथमिक विद्यालय में शौचालयों की स्थिति को देखा। 432 छात्र संख्या वाले स्कूल में छात्र-छात्राओं के लिए पर्याप्त शौचालय तो बने हैं लेकिन पर्यावरण मित्र ना होने के कारण कई शौचालयों में ताले लटके दिखे। यहां छात्र-छात्राओं के लिए दो अलग-अलग सामूहिक यूनिट बनी हैं। इसमें छात्रों के लिए छह और छात्राओं के लिए छह यूनिट लगी हैं। ये दोनों ही संयुक्त शौचालय खुले मिले लेकिन इनमें सफाई की व्यवस्था नहीं है। सफाई के इंतजाम ना होने के कारण चार एकल शौचालयों में भी ताले लटके थे जबकि दो शौचालय पुराने हो चुके हैं और प्रयोग के लायक नहीं हैं। सीएसआर के माध्यम से स्कूल को मिला छह यूनिट का रेडिमेड शौचालय पानी का इंतजाम ना होने की वजह से शोपीस बना हुआ है। स्कूल में एक हैंडपंप खराब पड़ा है जबकि दो चालू हालत में हैं।
दो अध्यापक ही नियमित
रुद्रपुर। वर्तमान में स्कूल में तीन शिक्षक पढ़ा रहे हैं। इनमें से एक शिक्षिका अस्थाई रूप से तैनात हैं। 432 छात्र संख्या के हिसाब से एक शिक्षक पर 100 से अधिक बच्चों को पढ़ाने का जिम्मा है। सरकारी मानकों के मुताबिक 40 बच्चों पर एक शिक्षक होना चाहिए। मानकों के आधार पर स्कूल में 10 से अधिक शिक्षक होने चाहिए। तीन स्वयंसेवी भी बच्चों को पढ़ाने के लिए स्कूल आते हैं।
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सिर्फ 190 बच्चे ही आए पढ़ने
रुद्रपुर। एक तरफ सरकार छात्रों की उपस्थिति बढ़ाने पर जोर दे रही है। वहीं कम शिक्षक होने के कारण स्कूल में छात्रों की उपस्थिति लगातार कम हो रही है। बृहस्पतिवार को 190 बच्चे ही स्कूल पहुंचे थे। अधिकतम 200 से 250 बच्चे ही स्कूल आते हैं। छात्रों की 100 प्रतिशत उपस्थिति होने पर हर कक्षा में दो सेंक्शन खोलने पड़ेंगे। संवाद
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विद्यालय गेट पर लगा रहता है ताला
रुद्रपुर। भदईपुरा प्राथमिक विद्यालय में प्रवेश करते समय गेट पर ताला लगा हुआ था। इंटरवेल के दौरान बच्चे आउटडोर में खेल दिखाई दिए। एक बच्चे से ताला खुलवाने को कहा तो वह तुरंत चाबी लेकर आ गया। प्रधानाध्यापक से ताला लगे होने के बारे में पूछने पर उन्होंने बताया कि बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए गेट पर ताला लगाया गया है। संवाद
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मजदूरी देकर पर्यावरण मित्र को बुलाते हैं। नियमित सफाई के इंतजाम नहीं हैं। शिक्षकों की कमी है इसलिए तीन स्वयंसेवी भी बच्चों को पढ़ाने के लिए स्कूल आते हैं। - रवि फुलारा, प्रधानाध्यापक