रुद्रपुर। अच्छी फसल उत्पादन की चाह में रासायनिक उर्वरकों का अंधाधुंध इस्तेमाल और जैविक खादों से दूरी मिट्टी की सेहत पर भारी पड़ रही है। तराई की उपजाऊ जमीन से लिए गए मिट्टी के नमूनों में मुख्य और सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी पाई गई है। विभाग की ओर से भारत सरकार के पोर्टल पर जांच रिपोर्ट अपलोड करने की कार्रवाई की जा रही है।
ऊधमसिंह नगर जिले से कृषि विभाग ने 9893 मिट्टी के नमूने लिए थे। इन नमूनों की जांच रुद्रपुर स्थित मंडलीय मृदा परीक्षण प्रयोगशाला में की गई थी। इसमें 65 फीसदी नमूनों में पोटाश और 65 फीसदी नमूनों में जीवांश कार्बन की कमी पाई गई है। इसके अलावा 10.98 फीसदी में सल्फर, 29.71 में बोरॉन और 11.28 फीसदी नमूनों में जिंक की कमी पाई गई। नैनीताल जिले में 2502 और पिथौरागढ़ में 3442 नमूने जांच के लिए प्रयोगशाला में आए हैं। नैनीताल में 41 फीसदी और पिथौरागढ़ में 25 फीसदी नमूनों में फाॅस्फोरस की कमी पाई गई है। मंडलीय मृदा परीक्षण प्रयोगशाला के सहायक निदेशक कल्याण सिंह ने बताया कि किसानों को कृषि भूमि की उर्वरता बढ़ाने के लिए जरूरी उपाय अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। जैविक खादों का प्रयोग करने को कहा जा रहा है। संवाद
प्रदेश में एक लाख मिट्टी के नमूनों का लक्ष्य
रुद्रपुर। भारत सरकार ने इस वित्तीय वर्ष में प्रदेश के जिलों में एक लाख पांच हजार 70 मिट्टी के नमूनों का लक्ष्य निर्धारित किया है। पहले यह लक्ष्य 87590 था और फिर लक्ष्य में संशोधन किया गया है। कुमाऊं मंडल की बात करें तो ऊधमसिंह नगर में 11840, नैनीताल में 7560, अल्मोड़ा में 9000 का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा बागेश्वर में 4000, पिथौरागढ़ में 7000, चंपावत में 4000 नमूने एकत्र करने का लक्ष्य है। संवाद