दिनेशपुर। दुर्गा मंदिर में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के पांचवें दिन कथावाचक विनोद शास्त्री ने श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं के साथ गोवर्धन लीला का वर्णन किया। पूजा-अर्चना के बाद भगवान को छप्पन भोग लगाया गया। कथावाचक ने कहा कि श्रीमद्भागवत में जीवन का सार समाहित है जो जीने की कला सिखाती है। इसे सुनने और समझने की आवश्यकता है। उन्होंने यज्ञ, दान और तप को आध्यात्मिक उन्नति का प्रमुख साधन बताया। कथा स्थल पर भक्तों की ओर से गोवर्धन पूजा के साथ भगवान को छप्पन भोग लगाकर आरती की गई। बाद में प्रसाद वितरण किया गया।