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Udham Singh Nagar News: चेक बाउंस के दोषी को छह माह की सजा

Thu, 07 Dec 2023 12:16 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
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रुद्रपुर। न्यायिक मजिस्ट्रेट/प्रथम अपर सिविल जज ने चेक बाउंस के दोषी को छह माह के कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने दोषी पर साढ़े दस लाख रुपये का अर्थदंड लगाया है। अर्थदंड जमा नहीं करने पर दोषी को एक महीने का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। अर्थदंड में से एक लाख 40 हजार रुपए परिवादी को प्रतिकर के रूप में दिए जाए और 10 हजार रूपये राज्य सरकार के खाते में जमा होगी।
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ग्राम रत्ना मडैया केलाखेड़ा निवासी उस्मान अल्वी ने 19 सितंबर 2019 को गांव के ही मो. आसिफ के खिलाफ कोर्ट में चेक बाउंस का परिवाद दर्ज कराया था। उस्मान का कहना था नवंबर 2017 में आसिफ ने उससे हाईवे किनारे अपनी जमीन का सौदा 40 लाख रुपये में किया था। उसने 16 दिसंबर 2017 को अपने लोन खाते से 15 लाख और इसी खाते से 26 दिसंबर को पांच लाख रुपये निकालकर बयाना के तौर पर आसिफ को दिए थे। बचे रुपए रजिस्ट्री के समय देना तय हुआ था। आसिफ की जमीन एनएच घोटाले में फंसने से रजिस्ट्री नहीं हो सकी। वर्ष 2019 में मोहम्मद आसिफ का पेट्रोल पंप मंजूर होने पर उसने जमीन बेचने से इन्कार कर दिया। रकम वापस मांगने पर आसिफ ने 15 जुलाई 2019 को एसबीआई का 10 लाख रुपये का चेक दिया, जो बाउंस हो गया। 16 अगस्त 2019 को उन्होंने अधिवक्ता के जरिए आसिफ को नोटिस भेजा था, लेकिन ना नोटिस का जवाब दिया गया और न ही रुपए वापस लौटाए गए। इस मामले की सुनवाई प्रथम अपर सिविल जज/ न्यायिक मजिस्ट्रेट कंचन चौधरी के न्यायालय में हुई थी। इसमें परिवादी के अधिवक्ताओं जावेद आलम, मोहम्मद रिजवान और अमित कालरा ने आसिफ पर दोष सिद्ध कर दिया।
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मारपीट के आरोपी देवर और ननद दोषमुक्त

काशीपुर। भाभी के साथ मारपीट और जान से मारने की धमकी देने के आरोपी भाई-बहन को न्यायिक मजिस्ट्रेट सिविल जज जूनियर डिवीजन की अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में दोष मुक्त कर दिया। जसपुर के ग्राम हमीरावाला निवासी राजवती ने नौ जुलाई 2014 को जसपुर कोतवाली में रिपोर्ट कराकर कहा कि उसके ससुर मलखान सिंह, सास जयवंती, देवर जितेंद्र, ननद प्रीति ने उसके और उसके बच्चों के साथ मारपीट की। आरोपियों ने उसे जान से मारने की धमकी भी दी। मामले की सुनवाई के दौरान सास-ससुर की मौत हो चुकी है। दो आरोपी देवर जितेंद्र और ननद प्रीति के खिलाफ आरोपों का विचारण न्यायालय में हुआ। दोनों पक्ष को सुनने और पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर न्यायिक मजिस्ट्रेट सिविल जज जूनियर डिवीजन की अदालत ने दोनों आरोपी को दोष मुक्त कर दिया।
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