स्वतंत्रता आंदोलन में जनजाति नायकों के योगदान पर हुई गोष्ठी
संवाद न्यूज एजेंसी
नानकमत्ता। देश की स्वतंत्रता के आंदोलन में जनजाति समाज के वीर क्रांतिकारियों के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता। गलत शिक्षा नीति के चलते आज की युवा पीढ़ी उनको भूलती जा रही है। समाज को ऐसे क्रांतिकारियों से अवगत कराने का कार्य बखूबी वनवासी कल्याण आश्रम निभा रहा है। यह बात आश्रम के क्षेत्रीय संगठन मंत्री डालचंद ने कही।
रविवार को सेवा प्रकल्प संस्थान उत्तराखंड व उत्तर प्रदेश की ओर से स्वतंत्रता आंदोलन में जनजाति नायकों के योगदान विषय पर सितारगंज, खटीमा, नानकमत्ता क्षेत्र की गोष्ठी आयोजित की गई। मुख्य वक्ता डालचंद ने जनजाति के क्रांतिवीरों महाराणा प्रताप, राजा जगदेव, बिरसा मुंडा, तिलकामांझी, पूजा राणा भील, बुद्धु भगत एवं उत्तराखंड के वीर केसरी चंद तथा नानूराम नेगी के त्याग और बलिदान को याद किया। गोष्ठी को सुरेश राणा, अमित गोयल, प्रेम सिंह टुरना, कामिनी राणा, दिनेश राणा, प्रकाश सिंह राणा, राकेश राणा ने भी संबोधित किया। वहां ललित राणा, जितेंद्र राणा, बबीता राणा, कमल राणा, कृष्ण राणा, आरती राणा, मधु राणा आदि थीं।