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Udham Singh Nagar News: समुद्र से मिलने वाले मोती की पहाड़ी राज्य उत्तराखंड में हो रही खेती

Fri, 03 Mar 2023 09:28 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
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रुद्रपुर। पहाड़ के किसान लंबे समय से पारंपरिक खेती करते आए हैं। यहां अब तक गन्ना, अनाज और सब्जी आदि का ही उत्पादन हो रहा था लेकिन अब किसान ऐसी फसलों का चुनाव कर रहे हैं जो उन्हें अधिक लाभ दे सकते। इसी क्रम में अब यहां मोती की खेती हो रही है। उत्तराखंड में हाल ही में प्रचलित हुए पर्ल फार्मिंग (मोती पालन) से लोग दोगुना पैसा कमा रहे हैं। मोती पैदा करने के लिए सीप को खाने के रूप में काई दी जाती है। काई खाकर सीप बड़े स्तर पर अमोनिया छोड़ती हैं। बताया कि अमोनिया के पानी को खेतों में डालने से अच्छी फसल पैदा होती है। सीप से मोती निकलने के बाद तालाबों को खाली कर दिया जाता है।
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ऊधमसिंह नगर जिले में जसपुर ब्लॉक के रहने वाले अशोक कुमार चौहान ने करीब एक साल पूर्व 20 हजार सीप से मोती पालन शुरू किया है। वह बताते हैं कि मोती सीप में मोती तैयार होने में लगभग 14 माह का समय लग जाता है। मोती पालन का समय अक्तूबर से मार्च के पहले हफ्ते तक रहता है। इसकी गुणवत्ता के अनुसार उसकी कीमत तय होती है। रामनगर के पीरूमदारा निवासी संजय और हेमंत ने 15 हजार सीप से मोती पालन का कार्य शुरू किया। इससे उन्होंने करीब 18.30 लाख रुपये कमाए। कोटद्वार के डटिया सकरपुर में जगत सिंह ने जब पर्ल फार्मिंग के बारे में जाना तो उन्हें इसकी खेती करनी चाही। इसके लिए पहले उन्होंने यूट्यूब के माध्यम से मोती उत्पादन का तरीका सीखा। फिर 20 हजार सीप से मोती पालन का कार्य शुरू किया है। संवाद

कोलकाता से लाए सीप
अशोक ने बताया कि उन्होंने मोती उत्पादन के लिए सीप कोलकाता से मंगाए। उनका कहना है कि एक सीप से दो मोती निकलते हैं। एक मोती का न्यूनतम मूल्य 100 रुपये के करीब होता है। सीप में मोती तैयार होने में करीब 18 से 24 माह का समय लगता है। इनकी ज्वैलरी शॉप में इनकी काफी मांग है।
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डाई से तैयार होते हैं अलग-अलग डिजाइन के मोती
अशोक के अनुसार सीप को तालाब में डालने से पहले उनकी सर्जरी कर उनमें साईं, राधा-कृष्ण, लक्ष्मी-गणेश, राम-सीता, ओम सहित विभिन्न तरीके की डाई डाली जाती है। ऐसे में सीप से पैदा होने वाला मोती विभिन्न प्रकार के आकार में ढल जाता है।

पांच लाख रुपए में शुरू कर सकते हैं मोती पालन

रुद्रपुर। अशोक चौहान ने बताया कि 60 बाई 80 फुट के छोटे तालाब में भी मोती पालन कर सकते हैं, इसमें करीब पांच लाख रुपए का खर्चा आता है। तालाब बनाने के बाद उसमें सीप डाले जाते हैं। डिजाइनर मोती के लिए सीप की सर्जरी कर उसमे डाई लगाई जाती है। प्रत्येक माह गोबर में काई मिलाकर सीप को दी जाती है। मिलाकर प्रत्येक माह एलगाई(काई) दी जाती है। बताया की 100 बाई 150 फुट व 100 बाई 200 फुट जैसे बड़े तालाबों में भी मोती पालन किया जा सकता है। बताया कि मोती पालन करने से पहले इसका प्रशिक्षण लेना बेहद जरूरी है।

मोती पालन सिखाने के लिए जसपुर में खोलेंगे प्रशिक्षण केंद्र
रुद्रपुर। मोती पालन का स्वरोजगार करने के इच्छुक लोगों को इससे जोड़ने के लिए अशोक चौहान जसपुर में ही जल्द ट्रेनिंग सेंटर खोलने वाले हैं। बताया कि सरकार की ओर से अभी मोती पालन के क्षेत्र में सब्सिडी देने की कोई योजना नहीं बनी है। ऐसे में निजी तौर पर ही लोगों को बैंक से लोन लेकर मोती पालन का कार्य करना पड़ता है। बताया कि जसपुर में जगह कम पड़ने से अब वह पिलखुवा में बड़े स्तर पर मोती पालन का कार्य करेंगे। संवाद

प्रदेश में मोती पालन से खुलेंगे स्वरोजगार के नए द्वार
रुद्रपुर। मत्स्य विभाग की ओर से लोगों को मोती पालन से जोड़ने के लिए सब्सिडी देने की योजना बनाई जा रही है। प्रदेश में कई उद्यमियों ने मोती पालन में स्वरोजगार शुरू कर दिया है। मत्स्य विभाग के वरिष्ठ निरीक्षक रविंद्र कुमार ने बताया कि लोगों में मोती पालन के लिए रुचि दिख रही है। शासन को मोती पालन में सब्सिडी देने का प्रस्ताव भेजा गया है। शासन से स्वीकृति मिली तो मोती पालन में लोगों को सब्सिडी मिल सकती है। संवाद
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