बरेली-सितारगंज फोरलेन परियोजना में गलत तरीके से बनाए अवार्ड पर लिए गए करोड़ों रुपये का मुआवजा वापस कराया जा रहा है। नकटपुरा गांव में गलत तरीके से मां-बेटे की ओर से संरचना पर लिए गए एक करोड़ 47 लाख रुपये में से बेटे ने 73 लाख 54 हजार रुपये का मुआवजा लौटा दिया है। मां को नोटिस तामील नहीं होने पर एसएलओ दफ्तर की ओर से मुआवजा लौटाने के लिए दोबारा नोटिस भेजने की कार्रवाई की जा रही है।
दरअसल, परियोजना में सितारगंज के नकटपुरा गांव में हिमांशु सिंघल और उनकी मां रुक्मिणी देवी की 0.6559 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहीत की गई थी। इसमें जमीन का मुआवजा अकृषि दर से नौ करोड़ 88 लाख रुपये और वहां मौजूद गोदाम व अन्य संरचना पर एक करोड़ 47 लाख रुपये का मुआवजा तय किया गया था। इसमें से संरचनाओं के मुआवजे का भुगतान दोनों को कर दिया गया था, लेकिन जमीन के मुआवजे का भुगतान नहीं हुआ था।
इसी बीच मुआवजा निर्धारण के खिलाफ एनएचएआई ने आर्बिट्रेशन न्यायालय में वाद दायर किया था। अदालत ने दस्तावेजों को देखने के बाद जमीन का मुआवजा अकृषि दर से निर्धारित करने को गलत करार दिया था और संरचना के मुआवजे को भी गलत करार दिया था। अदालत ने जमीन के मुआवजे को कृषि दर पर एक करोड़ 40 लाख किया था जबकि संरचनाओं का मुआवजा नहीं देने के आदेश दिए थे।
आर्बिट्रेशन अदालत के फैसले के बाद एसएलओ दफ्तर से हिमांशु सिंघल और रुक्मिणी देवी को संरचनाओं के मुआवजे को वापस करने का नोटिस भेजा गया था। एसएलओ कौस्तुभ मिश्रा ने बताया कि हिमांशु सिंघल ने नोटिस के बाद 73 लाख 54 हजार 200 रुपये वापस कर दिए हैं। रुक्मिणी देवी को भेजा गया पहला नोटिस तामील नहीं हुआ था और अब दूसरी बार नोटिस भेजने की कार्रवाई की जा रही है।