लाल सड़न रोग गस्त गन्ना का तना। संवाद
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काशीपुर। क्षेत्र के कई गांवों में गन्ना की फसल में लाल सड़न रोग लग चुका है। ग्राम किलावली, गढ़ीनेगी, मालधनचौड़, कुंडेश्वरी, मानपुर क्षेत्र के कई गांवों में गन्ना की फसल में लाल सड़न रोग लगने की सूचना मिली है। गन्ना वैज्ञानिकों ने किसानों को उपचार विधि बताई।
कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) प्रभारी डॉ. जितेंद्र क्वात्रा ने बताया कि यह रोग जुलाई-अगस्त में लगता है। शुरुआत में गन्ने के तने के अंदर लाल रंग के रेशे दिखाई देते हैं। फिर पूरा तना अंदर से लाल हो जाता है। गन्ने के अगोले भी तीसरी-चौथी पत्ती के किनारे से सूखने लगते हैं। पत्तियों पर लाल धब्बे दिखाई देने से पूरा अगोला सूख जाता है। इस गन्ना से रस नहीं निकलता। चीनी मिलें भी इस गन्ना को नहीं लेती हैं।
गन्ना की प्रजाति सीओ-238 में लाल सड़न बीमारी अधिक फैली है। गन्ना बुआई के लिए स्वस्थ रोग निरोधक प्रजाति का गन्ना चुनना चाहिए। लाल सड़न की रोकथाम के लिए गन्ना के टुकड़ों को गर्म पानी से उपचारित कर भूमि को शोधित कर बुवाई करें।
गन्ना की प्रजाति को हर साल बदल कर बोना चाहिए। प्रभावित गन्ना को जड़ सहित उखाड़ कर फेंक दें। उखाड़े गए पेड़ों के गड्ढों में 10-20 ग्राम ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव करें। थियोपिनेट मिथॉल/कार्बेेंडाजिम 0.2 प्रतिशत का गन्ना की जड़ों के पास मिट्टी में छिड़काव करना चाहिए।