खटीमा। श्रीलंका का नाम सुनते ही एक बारगी में जेहन में सोने की लंका का अक्स उभर आता है, जहां सभी मूलभूत सुविधाओं के अलावा वैभव भी है। लेकिन खटीमा के चकरपुर बाजार से सिर्फ दो-ढाई किमी दूर स्थित श्रीलंका गांव में आज भी मरीजों को लाने और ले जाने के लिए एंबुलेंस तक नहीं पहुंच जाती है। वन भूमि में बसे गांव के चलते यहां आए दिन तेंदुए व अन्य जंगली जानवरों के हमलों से ग्रामीण सहमे रहते हैं। जनप्रतिनिधियों तक समस्याओं पहुंचाने का भी ग्रामीणों को लाभ नहीं मिल रहा।
तीन ओर से गोरखा नाले से घिरा होने के कारण विल्हरी ग्राम पंचायत के इस गांव का नाम श्रीलंका पड़ा था। तीन दशक पहले से इस गांव में करीब 25-30 परिवार रह रहे हैं। वन भूमि और अन्य दिक्कतों के चलते आज ग्रामीणों को मूलभूत सुविधाओं से जूझना पड़ रहा है। ग्रामीण बताते हैं कि तीन ओर से नाले से घिरे होने के कारण गांव का एक ही रास्ता है, जो बेहद संकरा है। इसके चलते इमरजेंसी होने पर गांव में एंबुलेंस तक नहीं पहुंच पाती। गांव का मूल पेशा खेती है लेकिन खेत की जुताई के लिए ट्रैक्टर तक नहीं पहुंच पाता। गांव में रात के समय जंगली जानवर कभी बकरी तो कभी कुत्तों को अपना निवाला बना लेते हैं।
-
गांव के दूसरे हिस्से का रास्ता बंद होने का खतरा
खटीमा। गोरखा नाले के पाले गांव के दूसरे हिस्से में रहने वाले ग्रामीणों के सामने रास्ता बंद होने का खतरा उत्पन्न हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि स्टेडियम की चहारदीवारी के चलते गांव का रास्ता बंद हो रहा है। विल्हरी की ग्राम प्रधान पूनम देवी कहती हैं कि एक बार रास्ता खोलने के लिए सीएम से भी मांग की गई है। संवाद
-
बोले ग्रामीण
-
श्रीलंका गांव तीन ओर से गोरखा नाले से घिरा है। गांव की एकमात्र भी सड़क बेहद संकरी है जिस कारण इमरजेंसी में एंबुलेंस भी गांव में नहीं पाती है। इससे असुविधा होती है। - मुन्नी देवी।
-
गांव में रात के समय तेंदुए और अन्य जंगली जानवर घूमते नजर आते हैं। कुछ ही दिन पहले तेंदुए ने गांव में एक कुत्ता मार दिया था। इस तरह की घटनाएं अक्सर होती हैं। - पुष्पा देवी।
गांव का नाम भले ही श्रीलंका पड़ा हो, लेकिन यहां मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। गांव में सबसे अधिक समस्या सड़क और स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर है। - सपना देवी।