जसपुर। जीएसटी चोरी प्रकरण में टीम ने अभी सिर्फ बिलर गैंग का ट्रेलर दिखाया है जबकि पिक्चर अभी बांकी है। यह कहना है रजनीश यशस्थी, उपायुक्त एसआईबी का। उन्होंने रविवार को बताया कि करीब 300 फर्जी फर्में विभाग के रडार पर हैं। विभाग की ओर से भगोड़ों की प्रॉपट्री सीज करने की तैयारी की जा रही है। जब्त अभिलेखों के मिलान के बाद जीएसटी चोरों से पैसों की रिकवरी कराया जाना बांकी है। उसके बाद धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। अगर कोई बिलर रिकवरी नहीं देता है तो उसकी और उसके परिवार के नाम की प्रॉपट्री को जब्त की जाएगी। उन्होंने जसपुर की जनता का आभार जताया कि कार्रवाई के दौरान किसी ने विरोध नहीं किया। लोगों से बातचीत में पता चला कि क्षेत्र के सही व्यापारी इन फर्जी बिलर गैंग से त्रस्त थे।
ज्ञात हो कि शनिवार को उत्तराखंड कर कमिश्नर डाॅ. अहमद इकबाल के आदेश पर जीएसटी की विशेष अनुसंधान शाखा के संयुक्त निदेशक रणवीर सिंह की अगुवाई में 27 टीमों के कर्मचारियों ने छापा मारकर 18 करोड़ की जीएसटी की चोरी पकड़ी थी, जो जांच के बाद चार सौ करोड़ के करीब पहुंचने की उम्मीद है। संवाद
चलो ठीक हुआ गंदगी तो साफ हुई
जसपुर। जीएसटी बिलर गैंग पर छापे से लोगों में खुशी है। बड़े स्तर पर छापामारी के बाद भी शनिवार को पूरे दिन कोई विरोध में नहीं उतरा। हालांकि लकड़ी और व्यापार मंडल के पदाधिकारियों ने अधिकारियों पर उन्हें विश्वास में न लेने का आरोप लगाते हुए विरोध किया लेकिन बिलरों पर कार्रवाई के लिए वह कुछ भी नहीं बोले। 72 वर्षीय लकड़ी व्यापारी सईद अहमद ने बताया कि डेढ़ सौ साल पुरानी लकड़ी मंडी पिछले एक वर्ष में बिलरों की वजह से बदनाम हो गई। 76 वर्षीय लकड़ी व्यापारी मो. उमर ने बताया कि पिछले 60 वर्ष से लकड़ी का कारोबार कर रहे हैं। युवा जल्दी पैसा कमाने की होड़ में ईमानदारी के साथ मंडी को खत्म करने में लगे हैं।
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रविवार को नहीं दिखाई दिया रैकेट
जसपुर। फैज-ए-आम और पतरामुपर मार्ग पर लकड़ी के कई पड़ाव हैं। यहां लकड़ी की गाड़ियां उतरते और भरते समय कई बिलर बिल देने के लिए लाइन से खड़े होते थे। शनिवार को जीएसटी टीम की कार्रवाई के बाद रविवार को एक भी बिलर प्लाट पर नही दिखाई दिया। इससे सही व्यापारियों ने राहत की सांस ली।
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बिलर गैंग से गुलजार होते थे होटल
जसपुर। जीएसटी चोरी में हाथ लगी मोटी कमाई उड़ाने के लिए बिलर के गैंग ने पुराने पिक्चर हॉल स्थित करीब 15 होटल गुलजार किए थे। कोई दिन ऐसा नही जाता था कि इन बिलरों की दावत नहीं चलती थी। महंगी गाड़ियां रखना, सिगरेट का धुंआ उड़ाना इनकी आदत बन गई थी।
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इन प्रकरणें से चर्चा में रहा जसपुर
जसपुर। एनएच-74 घोटाले में प्रदेश की पहली गिरफ्तारी के बाद जसपुर का नाम चर्चा में रहा। उसके बाद छात्रवृत्ति घोटाला, नकली नोट छापने का मामला, मुर्दों को जिंदा दिखाकर बीमे की रकम हड़पने, फर्जी प्रमाणपत्रों से नौकरी कर रहे शिक्षक और अब जीएसटी चोरी प्रकरण से जसपुर फिर से चर्चा में आ गया है।