रुद्रपुर। कांग्रेस में महानगर अध्यक्ष सीपी शर्मा की ताजपोशी से कांग्रेस में आया भूचाल थम नहीं रहा है। ताजपोशी के विरोध और समर्थन के बहाने बड़े नेता एक दूसरे पर समर्थकों के सहारे निशाना साध रहे हैं। सियासी बिसात पर नेताओं के बीच चल रहे शह और मात के खेल में नेता भले ही वजूद का अहसास कराने की कोशिश कर रहे हों मगर चरम पर पहुंची गुटबाजी से पार्टी के अनुशासन पर भी सवाल उठ रहे हैं।
जनता के मुद्दे उठाने के बजाय कांग्रेस अपनों के झगड़ों में उलझकर रह गई है। कांग्रेस में समर्थन और विरोध की जिरह में केंद्र बिंदु पूर्व कैबिनेट मंत्री और किच्छा विधायक तिलकराज बेहड़ हैं। विवाद के तूल पकड़ने के बाद रुद्रपुर के बाद अन्य जगहों के नेताओं की भी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी की ओर महानगर अध्यक्ष पद पर सीपी शर्मा की नियुक्ति के विरोध में किच्छा विधायक तिलकराज बेहड़ के रुद्रपुर आवास पर नाराज नेताओं का जमावड़ा लगा था। यहां हुई सभा में प्रदेश नेेतृत्व के फैसले पर सवाल खड़े किए गए। बेहड़ ने भी मनोनयन पर उनकी राय नहीं लेने, कार्यकर्ताओं के सम्मान की लड़ाई लड़ने के साथ ही कुमाऊं से ही प्रदेश अध्यक्ष, नेता प्रतिपक्ष और उपनेता प्रतिपक्ष की नियुक्ति कर गढ़वाल की उपेक्षा का आरोप लगा दिया था।
गढ़वाल की उपेक्षा का सवाल उठने के बाद समर्थन और विरोध की लड़ाई बड़े नेताओं के बीच चली गई। पर्दे के पीछे से नेताओं ने समर्थकों को आगे कर निशाने साधने शुरू किए। महानगर अध्यक्ष को लेकर समर्थन और विरोध का स्वर रुद्रपुर तक सीमित नहीं रहा बल्कि किच्छा के साथ ही हल्द्वानी के नेता भी कूद गए। बेहड़ समर्थक और सीपी शर्मा के बहाने उनके विरोधी लामबंद होना शुरू हो गए। बेहड़ के समर्थन में रुद्रपुर के नेताओं के साथ ही किच्छा कांग्रेस कूद गई।
वहीं दूसरी ओर हल्द्वानी विधायक सुमित हृदयेश और हरीश पनेरू ने गुटबाजी को पार्टी हित के लिए गलत करार दिया। हरीश ने तंज कसा कि लोग एक साल से भाजपा में शामिल होने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन भाजपा उन्हें नहीं ले रही है। दिलचस्प बात है कि प्रदेश नेतृत्व ने अपनी पार्टी में चल रहे घमासान पर दखल देने की जहमत तक नहीं उठाई है।