पिंक ताइवान और वीएनआर अमरूद की खेती से किसान होंगे मालामाल
पिंक ताइवान एक वर्ष में ही देने लगता है फल, साल में तीन बार होती है फलों की पैदावार
तीन साल के लिए प्रति हेक्टेयर में 50 हजार का अनुदान देगा उद्यान विभाग
चयन राजपूत
रुद्रपुर। पिंक ताइवान व वीएनआर अमरूद की खेती कर जिले में किसान मालामाल होंगे। अमरूद के पौधे लेने पर उद्यान विभाग तीन साल के लिए प्रति हेक्टेयर 50 हजार रुपये की सब्सिडी भी देगा है।
अमरूद की एल-49 प्रजाति के बाद अब जिले में पिंक ताइवान व वीएनआर अमरूद की प्रजाति लगाने के लिए उद्यान विभाग जोर दे रहा है। उद्यान विभाग के मुताबिक उन्नत किस्म के पिंक ताइवान अमरूद में एक वर्ष के अंदर ही पौधे पर केवल एक फुट की ऊंचाई में फल लगने लगते हैं।
पौधे में 12 महीने फूल व फल लगे रहते हैं। इसका कच्चा फल भी स्वादिष्ट व खाने योग्य होता है। जो पकने के बाद अंदर से गुलाबी रंग का होता है। इसमें एक वर्ष में कम से कम तीन बार फल लगते हैं। एक पेड़ में साल में कम से कम 30 से 40 किलो फल की पैदावार होती है।
वीएनआर अमरूद नाशपाती के सामान दिखने में और आकार में काफी बड़ा होता है, इसमें काफी कम बीज होते हैं। आकार 4 से 12 सेंटीमीटर होता है। यह फल उपजाऊ किस्म और सभी प्रकार की मिट्टी के लिए उपयुक्त होता है। इसकी 15 दिनों की लंबी सेल्फ लाइफ होती है, फ्रिज में रखने के बाद तो यह एक माह तक चलता है। उद्यान विभाग जिले में अमरूद की इन दोनों प्रजातियों को बढ़ावा दे रहा है।
इंसेट-
जिले में वर्ष 2016 से बढ़ता गया अमरूद का क्षेत्रफल व उत्पादन
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वर्ष - क्षेत्रफल(हेक्टेयर) - उत्पादन(मीट्रिक टन)
2016-17 - 1200 - 9627
2017-18 - 1252 - 9884
2018-19 - 1392 - 9921
2019-20 - 1469 - 10556
2020-21 - 1480 - 11024
2021-22 - 1521 - 11180
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कोट-
किसानों का आम व लीची में बागवानी की तरफ अब रुझान कम हो रहा है, अमरूद की तरफ रुझान ज्यादा बढ़ने लगा है। किसानों की रुचि के हिसाब से फलों की बागवानी की जाती है, उद्यान विभाग अमरूद की इन दोनों प्रजातियों को लगाने के लिए अनुदान भी दे रहा है। जिले में पहली बार इन दोनों प्रजाति की बागवानी की जाएगी। - भावना जोशी, मुख्य उद्यान अधिकारी।