फलोत्पादन के बाद उनकी छंटाई बेहद उबाऊ और खर्चीला काम है। इसके लिए पंतनगर विवि के वैज्ञानिक ने मल्टी फ्रूट ग्रेडर मशीन को ईजाद किया है। समाधान मिलने से अब उत्पादकों का यह काम बहुत आसान हो जाएगा, क्योंकि इस मशीन से विभिन्न प्रकार के फलों की छंटाई बेहद कम समय और खर्च में हो जाएगी। वैज्ञानिक ने इसका पेटेंट भी हासिल कर लिया है।
जीबी पंत कृषि विवि के प्रौद्योगिकी महाविद्यालय में फूड एंड प्रोसेसिंग विभाग के प्राध्यापक डाॅ. पीके ओमरे ने 0.5 एचपी के मोटर का प्रयोग कर मल्टी फ्रूट ग्रेडर मशीन का अविष्कार किया है। उन्होंने बताया यह मशीन विद्युत चालित, कम वजनी और एक से दूसरी जगह पर आसानी से स्थानांतरित होने वाली है। इसकी एक यूनिट बनाने में 40 हजार रुपये की लागत आई है। यह मशीन फलों के श्रेणी निर्धारण का कार्य उनके वजन एंव आकार के आधार पर करती है। मल्टी फूट ग्रेडर सेब, नांरगी, मौसमी, अनार, अमरूद एवं इन्हीं के समान गोलाकार फलों के लिए बेहद उपयुक्त है।
ग्रेडर फल उत्पादकों के लिए बहुत उपयोगी है। फलों की ग्रेडिंग के लिए इसे बाग अथवा ग्रेडिग सेंटर बनाकर उसमें रखा जा सकता है। यह मशीन 350-400 किलोग्राम प्रतिघंटा फलों की छंटाई कर सकती है। यह मशीन व्यावसायीकरण के लिए तैयार है। यदि कोई फलोत्पादक इस मशीन को लेना चाहता है, तो विभाग में उनसे संपर्क कर सकता है।
फूड एंड प्रोसेसिंग विभाग के प्राध्यापक डाॅ. पीके ओमरे का मल्टी फ्रूट ग्रेडर का आविष्कार फल उत्पादकों की फल छंटाई की समस्या तो दूर करेगा। अविष्कार से फलोत्पादकों की ग्रेडिंग की समस्याएं आसान होंगी। -डाॅ. मनमोहन सिंह चौहान, कुलपति, जीबी पंत कृषि विवि।