रुद्रपुर सिडकुल की एमएमटी कंपनी में रविवार सुबह ईटीपी टैंक की सफाई के दौरान गैस के रिसाव से चार श्रमिकों व दो ठेकेदारों की हालत बिगड़ गई। बेहोशी की हालत में उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। आईसीयू में भर्ती एक श्रमिक की हालत गंभीर बनी हुई है। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर कंपनी के अधिकारियों से गैस रिसाव के बारे में जानकारी जुटाई।
सिडकुल के सेक्टर 10 में स्थित एमएमटी कंपनी (मेटलमैन माइक्रो टर्नस कंपनी) में ईटीपी टैंक की सफाई के लिए ग्रीन पार्क निवासी प्रवीन को ठेका मिला था। प्रवीन ने सीवर टैंक की सफाई का काम ट्रैक्टर चालक प्रीत विहार निवासी प्रकाश को सौंपा था। सुबह करीब 10 बजे प्रकाश अपने साथ चार श्रमिकों खेड़ा निवासी रमेश, सुरेश, सचिन व प्रीत विहार निवासी दिनेश को लेकर कंपनी में पहुंचा। प्रवीन भी कंपनी में पहुंच गया था।
श्रमिक दिनेश के मुताबिक सबसे पहले टैंक में सफाई के लिए रस्सी के सहारे सुरेश उतरा लेकिन कुछ ही देर में वह बेहोश होकर टैंक के भीतर ही गिर गया। सुरेश को बचाने के लिए रमेश और सचिन भी उतरे तो वह भी बेहोश हो गए। उन्हें बचाने के लिए दिनेश, प्रकाश और प्रवीन टैंक के अंदर उतरे और वे भी गैस की चपेट में आकर बेहोश हो गए। इससे कंपनी में अफरातफरी मच गई। सभी को निजी अस्पतालों में भर्ती करवाया गया।
सुरेश, रमेश, सचिन व प्रकाश किच्छा रोड स्थित निजी अस्पताल में भर्ती हैं जबकि दिनेश और प्रवीन काशीपुर रोड पर स्थित निजी अस्पताल में भर्ती है। डॉक्टरों ने बताया कि सुरेश की हालत गंभीर होने के कारण उसे आईसीयू में रखा गया है। बाद में सभी होश में आ गए थे। इधर सिडकुल पुलिस ने अस्पताल पहुंचकर श्रमिकों व ठेकेदारों का हाला जाना और कंपनी के अधिकारियों से मामले की जुटाई।
सीओ पंतनगर तपेश चंद्र का कहना है मामले की जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि अभी यह तय नहीं हो सका है कि श्रमिक ऑक्सीजन की कमी से बेहोश हुुए हैं या किसी घातक गैस की चपेट में आने से इसकी जांच की जा रही है। वहीं एमएमटी कंपनी के एचआर सैय्यद रेयाजउद्दीन ने बताया कि श्रमिकों की हालत में अब सुधार है।
500 रुपये की दिहाड़ी में गए थे श्रमिक
टैंक सफाई के दौरान बेहोश हुए श्रमिक सचिन ने बताया कि सीवर टैंक की सफाई करने वाला ट्रैक्टर चालक प्रकाश उसे अपने साथ ले गया था। वह 500 रुपये की दिहाड़ी में गए थे। टैंक की सफाई करते समय अचानक सिर चकराने लगा और फिर बेहोशी छाने के बाद कुछ पता नहीं चला। जब होश आया तो स्वयं को अस्पताल में भर्ती पाया।
क्या है ईटीपी
एफ्लूएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ईटीपी) लगभग सभी बड़ी कंपनियों में होता है। इसमें मुख्यत: तीन टैंक होते हैं जिनका उपयोग कंपनी से निकलने वाले अपशिष्ट, कचरे, गंदगी, मलबा, ग्रिट, प्रदूषण, विषाक्त और गैर विषैले पदार्थ व पॉलीमर आदि को हटाने के लिए किया जाता है। अस्पताल में भर्ती ठेकेदार प्रवीन ने बताया कि एमएमटी कंपनी के ईटीपी में तीन टैंक हैं जबकि एक टैंक की सफाई पिछले रविवार को भी हुई थी लेकिन उस दौरान किसी प्रकार की कोई घटना नहीं हुई थी।
बिना गैस मास्क के टैंक में उतरे थे श्रमिक
ईटीपी टैंक में उतरने से पहले सुरक्षा के लिए श्रमिकों को उपकरण दिए जाते हैं। श्रमिकों को गैस मास्क, गैस डिटेक्टर, ऑक्सीजन सिलेंडर, टॉर्च युक्त हेलमेट व गमबूट दिया जाता है लेकिन अस्पताल में भर्ती श्रमिकों ने बताया कि गमबूट छोड़कर उन लोगों को और किसी भी तरह का सुरक्षा उपकरण नहीं दिया गया था। संवाद
ईटीपी टैंक की सफाई के लिए होने चाहिए कुशल श्रमिक
एमएमटी कंपनी में टैंक की सफाई के लिए नगर निगम के सामने खड़े होने वाले श्रमिकों को लाया गया था जबकि कंपनियों में तमाम तरह के अपशिष्ट विषाक्त पदार्थ टैंकों में जमा होते हैं। ईटीपी में टैंकों की सफाई के लिए कुशल श्रमिकों को उतारा जाता है। कंपनियां बाकायदा टैंकों की सफाई के लिए कुशल मजदूरों की नियुक्ति करती है लेकिन कंपनी में साधारण श्रमिकों को बुलाया गया था। यह साधारण श्रमिक मुख्यत: घरों के सीवर टैंक की सफाई करते हैं। उसी तरह यहां पर भी श्रमिक टैंक के भीतर उतरे थे हालांकि कोई भी कंपनी प्लांट के भीतर घुसने से पहले बाहरी लोगों को ट्रेनिंग देती है। इसके अलावा सुरक्षा के उपकरण भी उपलब्ध कराती है।
बताया जा रहा है कि कंपनी में श्रमिकों को साधारणतया सीधे टैंक परिसर में उतार दिया जाता था। हालांकि जो कुशल श्रमिक होते हैं वे पहले माचिस की तीली जलाकर टैंक की गैस का अंदाजा लगा लेते हैं लेकिन शायद इन श्रमिकों ने इस तरह का उपयोग नहीं किया था अन्यथा उन्हें गैस का अंदाजा लग जाता। इस संबंध में डीएम युगल किशोर पंत कहना है कि कंपनियों के ईटीपी टैंक की सफाई के लिए कुशल मजदूर ही बुलाए जाने चाहिए। बाहरी श्रमिकों से कंपनी के ईटीपी टैंक की सफाई नहीं कराई जाए।