गूलरभोज स्थित हैचरी में बतखें नहीं होने से वीरान पड़ी हैचरी। संवाद
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रुद्रपुर। बतख पालन कर आजीविका चलाने वाले लोगों के लिए बुरी खबर है। गूलरभोज में स्थित प्रदेश की पहली डक हैचरी का चार साल में ही दम निकल गया है। पशुपालन विभाग को कर्नाटक समेत अन्य राज्यों से बतखों का पेरियंटल (पैतृक) स्टॉक नहीं मिलने से दिक्कतें होनी लगी हैं। हाल यह है कि गूलरभोज में बतख हैचरी वीरान पड़ गई है।
ऊधमसिंह नगर में चार साल पहले शक्तिफार्म और दिनेशपुर में बंगाली समुदाय को देखते हुए गूलरभोज में बतख हैचरी की स्थापना की गई। बता दें कि मेघालय, मणिपुर, असम के साथ ही पश्चिम बंगाल और अन्य प्रदेशों में बतख पालन बड़ा व्यवसाय है। इसी को देखते हुए जिले में भी लोगों को बतख पालन के बढ़ावे के लिए हैचरी खोली गई थी।
विभाग की ओर से हैचरी से 30 रुपये में बतख के चूजे दिए जाते थे। बतख पालन से स्वरोजगार करने वाले जिले में 200 बतख पालक पशुपालन विभाग में दर्ज हैं लेकिन अब इन लोगों को चूजे नहीं मिलने से दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। पशुपालन विभाग को बतखों के पेरियंटल स्टॉक के लिए अन्य राज्यों में संपर्क करना पड़ रहा है लेकिन बेंगलुरु, कर्नाटक समेत कहीं से भी विभाग को बतख नहीं मिल पा रही हैं। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. एसबी पांडेय ने बताया कि फिलहाल बतख पालकों की मांग पूरी नहीं कर पा रहे हैं। पेरियंटल स्टॉक नहीं मिलने से दिक्कत हो रही है।
25 लाख की लागत से बनाई गई है हैचरी
रुद्रपुर। भारत सरकार की राष्ट्रीय पशुधन विकास योजना के तहत गूलरभोज स्थित पशुपालन केंद्र परिसर में 25 लाख की लागत से बतख प्रजनन केंद्र का निर्माण किया गया। इसी में ही तालाब, बतखों के लिए शेड, मशीनें आदि लगाई गई हैं लेकिन बतख नहीं मिलने से हैचरी बंद पड़ी हुई है। संवाद