खटीमा। सिसैया गांव में वन, सिंचाई विभाग की संयुक्त टीम सर्वे करने नहीं पहुंची जबकि राजस्व विभाग की टीम मौके पर मौजूद रही। इन टीमों के बैठक में न आने से गांव के करीब एक हजार परिवारों में आक्रोश है।
ग्राम सिसैया की 1491 एकड़ भूमि पर कब्जे का विवाद वर्ष 1960 के बाद से बना हुआ है। केंद्र सरकार की स्वामित्व योजना के तहत इस क्षेत्र का सर्वे होना है। ग्रामीणों की मांग पर एसडीएम रविंद्र सिंह बिष्ट ने राजस्व, वन एवं सिंचाई विभाग के अधिकारियों से एक अगस्त को मौके पर पहुंचकर संयुक्त सर्वे करने के निर्देश दिए थे लेकिन तयशुदा तिथि पर सिर्फ राजस्व विभाग की टीम मौके पर पहुंची जबकि सिंचाई और वन विभाग के अधिकारी, कर्मचारी सर्वे करने नहीं आए।
गांव पहुंचे सर्वे कानूनगो सितारगंज संतोष कुमार श्रीवास्तव, सर्वे लेखपाल कल्लू सिंह, लेखपाल अनिल कुमार, पूर्व जिला पंचायत सदस्य कन्हैया लाल, पूर्व प्रधान राम संजीवन कई ग्रामीणों के साथ वन एवं सिंचाई विभाग के अधिकारियों का इंतजार करते रहे। इसके बावजूद दोनों विभागों से किसी भी कर्मचारी के सर्वे करने न आने से ग्रामीणों में गुस्सा है। ग्रामीण अपने कब्जे की जमीन का स्वामित्व न मिलने से चिंतित हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि वर्ष 2016 में 1491 एकड़ जमीन की बंदोबस्ती संबंधी सरकारी आदेश के बाद 2017 में शुरू हुआ बंदोबस्ती का काम पूरा नहीं हो सका है। जमीनों के बंदोबस्ती और मालिकाना हक के लिए सितंबर 2021 में कुमाऊं कमिश्नर से मुलाकात के बाद डीएम ने अक्तूबर 2021 में कमेटी बनाई। फिर भी समस्या नहीं सुलझी। ग्रामीणों के कब्जे वाली 1491 एकड़ भूमि के स्वामित्व का पता नहीं चल सका। वहां बीरबल, रामचंद, प्रमोद कुमार, श्रीराम अवधेश, दिनेश कुमार, द्वारिकेश, संतोष साहनी, कुबेर राजभर, श्याम नारायण आदि थे।