गदरपुर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र।
गदरपुर। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में क्षेत्र की जनता को अल्ट्रासाउंड की सुविधा मुहैया नहीं हो पा रही है। अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट का पद स्वीकृत नहीं हो पाने का खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। मजबूरन लोगों को रुद्रपुर और बाजपुर की दौड़ लगानी पड़ रही है।
वर्ष 2005 में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में बदला गया था। केंद्र में आयुष विंग के अलावा प्रभारी चिकित्सा अधिकारी सहित सात पद स्वीकृत हैं। इसमें फिजिशियन, हड्डी रोग, महिला रोग और बाल रोग विशेषज्ञ नियुक्त हैं लेकिन मरीजों को सर्जन, ईएनटी और त्वचा विशेषज्ञ के साथ सीटी स्कैन और अल्ट्रासाउंड की सुविधा नहीं मिल पा रही है। सीएचसी में वार्ड बॉय व स्वीपर के चार-चार पद स्वीकृत हैं, लेकिन लंबे समय से दो-दो पद रिक्त है। फार्मासिस्ट के दो पदों पर नियुक्ति नहीं हो सकी है। वैकल्पिक व्यवस्था के सहारे सकैनिया के फार्मासिस्ट को प्रभार सौंपकर काम चलाया जा रहा है। केंद्र में सरकारी आवासों की कमी भी है। संवाद
दो लाख की आबादी सीएचसी पर निर्भर
सीएचसी से गदरपुर और आसपास की करीब दो लाख से अधिक की आबादी स्वास्थ्य लाभ लेती है। गर्मी के मौसम में केंद्र में 200-250 मरीजों की ओपीडी होती है। जच्चा बच्चा केंद्र में वेंटिलेटर तो है, लेकिन लंबे समय से टेक्नीशियन का अभाव है।
निदेशालय को बुनियादी सुविधाएं और संसाधनों की कमी के बारे में समय-समय पर अवगत कराया जाता है। रेडियोलॉजिस्ट का पद स्वीकृत नहीं होने से अल्ट्रासाउंड की सुविधा शुरू नहीं हो सकी है। - डॉ संजीव सरना, प्रभारी चिकित्साधिकारी