कोट....
दीपक बाली मेरे मित्र हैं। लेकिन मित्र सिर्फ कहने से मित्र नहीं होता। मित्र को अपने मित्र की व्यवस्था, उसकी मजबूरी और लाचारी को समझना चाहिए। मैं दीपक की वर्तमान की मजबूरी को जानता हूं। दीपक बाली जो शब्द बोल रहे थे, वो एक एक शब्द उसपर भारी पड़ रहा होगा। मैं इसकी कीमत जनता हूं। बाकी कोई कॉमेंट नहीं करूंगा। - अरविंद पांडेय, विधायक , गदरपुर