रुद्रपुर। तराई में उगाई जा रही मटर को उत्तर प्रदेश के जालौन और मोहनपुरा की मटर से सस्ती दरों पर खरीदने से किसानों में एक बार फिर आक्त्रसेश पनप रहा है। इसके विरोध में सोमवार को रुद्रपुर मंडी समिति में किसान विरोध प्रदर्शन करेंगे। साथ ही मटर का न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित करने की मांग की जाएगी।
बीती पांच और छह फरवरी को किसानों ने रुद्रपुर मंडी समिति में मटर के उचित मूल्य के लिए धरना दिया था। इसके बाद प्रशासन और फ्रोजन यूनिट संचालकों के साथ वार्ता के बाद किसानों ने धरना खत्म कर दिया था और यूपी की जालौन मंडी समिति के मूल्य के आधार जिले के किसानों को भी मटर का मूल्य दिया जाने लगा था। अब किसानों का कहना है कि मंडी समिति में कुछ आढ़ती फिर से मनमानी पर उतर आए हैं।
तराई किसान संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष तजिंदर सिंह विर्क ने कहा कि सरकार और विभागीय अधिकारियों की लापरवाही से मक्के और सूरजमुखी के बाद अब मटर की खेती से किसान विमुख हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि एक तरफ मक्के को बेमौसमी धान के विकल्प के रूप में प्रचारित किया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर मक्के का उचित दाम नहीं मिल रहा है। कोरोना काल में जिले में 600 रुपये प्रति क्विंटल की दर से मक्का बिका था। अब यही स्थिति मटर के साथ पैदा की जा रही है।
उन्होंने कहा कि फ्रोजन यूनिट संचालक किसानों के साथ हुए समझौते का उल्लंघन कर तराई की मटर को यूपी से सस्ती दरों में खरीद रहे हैं। जालौन और मोहनपुरा की मटर को ढुलाई का खर्चा जोड़कर खरीदा जा रहा है। तराई की मटर के मूल्य भी यूपी के बराबर होने चाहिए। विर्क ने आरोप लगाया कि मटर की बोली में कुछ आढ़ती मनमानी कर रहे हैं और मंडी सचिव के निर्देश भी नहीं मान रहे हैं। उन्होंने कहा कि मटर के न्यूनतम समर्थन मूल्य और अन्य मांगों के लिए सोमवार सुबह 10 बजे रुद्रपुर मंडी समिति में किसान धरना देंगे।
जिले में घट रही मटर की खेती चिंता का विषय
जिले में इस वर्ष करीब 3200 हेक्टेयर कृषि भूमि में मटर की खेती की गई है। वर्ष 2018.19 में जिले में 3599 हेक्टेयर कृषि भूमि में मटर की खेती की गई थी। इसके बाद 2019.20 में 3701 हेक्टेयर कृषि भूमि में मटर लगाई थी। जिले में मटर की खेती का क्षेत्रफल घटना चिंता का विषय है।
मटर की फसल तैयार होने के बाद घटाए मूल्य
रुद्रपुर। किसानों का आरोप है कि इस बार जिले में जब खेतों से मटर की फलियां तोड़नी शुरू हुई थीं तब मूल्य 18 रुपये प्रति किलो मिल रहा था। अब मटर पूरी तरह से तैयार होने के बाद जब किसान अधिक मात्रा में मटर को मंडी तक ला रहे हैं तो मौके का फायदा उठाकर उनकी मटर सस्ते में खरीदा जा रहा है। संवाद