काशीपुर। अघोषित बिजली कटौती से उद्योग भी अछूते नहीं हैं। गर्मी के सीजन में बिजली न मिलने पर फैक्टरियों ने जनरेटर का सहारा लिया तो उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ा। प्लांट बीच में रुकने के कारण फैक्टरियों में उत्पादन भी कम हुआ है।
बिजली की अघोषित कटौती के दौरान प्लांटों को डीजल से चलाना पड़ा। डीजल से प्रति यूनिट 15 रुपये का खर्च आता है जबकि बिजली का खर्च प्रति यूनिट साढ़े आठ रुपये है। ऐसे में डीजल से खर्च लगभग दोगुना हो जाता है। दूसरी ओर लगातार चलने वाले प्लांटों का प्रोसेसिंग माल अघोषित कटौती से खराब हो जाता है क्योंकि लाइन में लगाया गया सारा माल बिजली जाते ही ठंडा पड़ जाता है।
बिजली का बल्ब बनाने सहित कई कार्य ऐसे हैं जिनमें बीच में प्रक्रिया रुकने से माल खराब हो जाता है। ऐसे में प्रति पीस खर्च बढ़ जाता है। इससे उद्योगों को बड़ा नुकसान होता है। यूपीसीएल के विद्युत नियामक आयोग के समक्ष भी यह मुद्दा उठाया जा चुका है। आयोग के सामने उद्यमियों ने कहा था कि उद्यमियों ने कहा कि ऊर्जा प्रदेश में बिजली की कटौती के कारण उत्पादन बंद करना चिंताजनक है। अगर ऐसा ही हाल रहा तो वह दिन दूर नहीं जब ऊधमसिंह नगर के उद्यमी यहां उद्योग चलाने के लिए सोचने पर मजबूर हो जाएंगे।
उद्यमियों का कहना है कि अगर प्लांट शटडाउन हो जाता है और उसे दोबारा से सुचारु करना पड़ता है तो संबंधित कंपनी को भारी नुकसान उठाना पड़ता है क्योंकि प्लांट को नए सिरे से चलाने में अतिरिक्त ऊर्जा और श्रम लगाना पड़ता है।
अन्य सालों की अपेक्षा इस बार गर्मियों में बिजली कटौती काफी ज्यादा हुई है। सरकार को दीर्घकालीन खरीद कर उद्योगों को सस्ती बिजली दिलानी चाहिए। प्रदेश की पनबिजली परियोजनाओं में हर मौसम में बिजली का उत्पादन प्रभावित होता है। गैस महंगी होने के कारण गैस संचालित ऊर्जा प्लांटों से बिजली का उत्पादन काफी कम हुआ। बिजली कटौती के कारण कुछ उद्योगों ने तो 15 प्रतिशत तक उत्पादन कम किया है। इससे जिले में उद्योगों को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ होगा।
- विनीत कुमार संगल, अध्यक्ष, केजीसीसीआई, काशीपुर।
गर्मी में सिर्फ काशीपुर में ही नहीं पूरे देश में बिजली का संकट था। यूक्रेन-रूस युद्ध के कारण वहां से हमारे यहां गैस नहीं आ सकी। इस कारण गैस से संचालित कई प्लांट बंद हो गए। एक तरह से पूरे विश्व पर इसका असर पड़ा लेकिन अब स्थिति सामान्य हो गई है। बिजली की अघोषित कटौती नहीं की जा रही है।
- अनिल वर्मा, एसई, ऊर्जा निगम, काशीपुर।