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Udham Singh Nagar News: पुरुषों के वर्चस्व के बीच मनीषा बनीं कुमाऊं की पहली फूड डिलीवरी गर्ल

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रुद्रपुर में नौकरी की तलाश में आई मनीषा बेटियों का भविष्य संवारने के लिए रोजाना कर रही 17 घंटे काम
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चंदन बंगारी
रुद्रपुर। अगर आपने खाने का ऑनलाइन ऑर्डर दिया है और दरवाजे पर कोई महिला डिलीवरी देने आ जाए तो चौकिएगा नहीं, ये कुमाऊं की पहली फूड डिलीवरी गर्ल मनीषा बोरा हैं। दो बेटियों का भविष्य सुधारने के लिए एक ऑनलाइन फूड ऑर्डरिंग कंपनी में डिलीवरी गर्ल के रूप में मनीषा रोजाना 16 से 17 घंटे सेवाएं दे रही हैं। पुरुषों के वर्चस्व वाले क्षेत्र काम करने के सवाल पर वह कहती हैं कि आज के दौर में महिलाएं हर कार्य करने में सक्षम हैं और जिम्मेदारियाें के आगे कोई काम छोटा नहीं होता। कोई भी काम पुरुष-महिला का नहीं होता है, काम को काम के नजरिए से देखा जाना चाहिए।
टनकपुर निवासी 31 साल की मनीषा बोरा अप्रैल में सिडकुल की कंपनियों में काम करने वाली दोस्तों के पास काम की तलाश में आई थीं लेकिन उन्होंने दूसरा काम करने का मन बनाया। एक दिन उन्होंने काशीपुर बाइपास रोड से गुजरते समय फूड डिलीवरी ब्वाॅय को देखा। यहीं से उनका डिलीवरी गर्ल का सफर शुरू हुआ। शहर नया था और अधिकतर रास्ते नहीं जानने के कारण उन्होंने गूगल मैप की सहायता से इस चुनौती को पार किया। शुरूआत में थोड़ा परेशानी हुई लेकिन फिर सब जिंदगी का हिस्सा हो गया। संवाद
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पापा की बाइक से संघर्ष का सफर
मनीषा बताती हैं कि लाइन डिलीवरी के लिए वाहन की जरूरत थी तो पिता की बाइक ली और उससे डिलीवरी करती हैं। कहना है कि जितने आर्डर डिलीवर करते हैं, उतना पैसा मिलता है। उनकी ड्यूटी सुबह सात बजे से शाम सात बजे तक है और वह ज्यादा रुपये कमाने के लिए 12 बजे तक काम करती हैं।

बेटियों के खातिर सिडकुल में नौकरी नहीं की
बकौल मनीषा आठ साल पहले उनकी शादी हुई थी। उनकी दो बेटियां हैं। वैवाहिक जीवन में आईं परेशानियों के कारण उनकी बेटियां मायके में रहती हैं। अपनी बेटियों को बेहतर भविष्य देने के लिए उन्होंने काम करने का फैसला किया। परेशानियों के के बारे में बताते हुए कहती हैं कि कई काम में मुश्किलें आती हैं लेकिन कुछ करने की सोच पर ये मुश्किलें भारी नहीं पड़ती हैं। भीषण गर्मी में सड़क पर निकलकर काम करना पड़ता है।

रात में कसम करने पर सहकर्मियों से बनाए रखती हैं संपर्क
मनीषा बताती हैं कि रात में लंबे रूट पर सामान डिलीवर करने के लिए जाते-आते समय वह किसी न किसी कंपनी कर्मी से कनेक्ट रहती हैं ताकि दिक्कत होने पर मदद ली जा सके। एक बार रात में ग्राहक ने डिलीवरी लेने के लिए फोन नहीं उठाया। रात का समय था और ऑर्डर निरस्त होने में 40 से 45 मिनट लगते। ऐसे में सुरक्षा के लिहाज से उन्होंने स्वयं ही उस ऑर्डर का पेमेंट किया।

पंतनगर, किच्छा और गदरपुर तक करती हैं डिलीवरी
रुद्रपुर। मनीषा कहती हैं कि डिलीवरी के काम से ज्यादा रुपये तो नहीं मिलते हैं, मगर खर्चा चल जाता है। स्वाभिमान के साथ मेहनत से कमाए रुपयों से अलग ही सुकून मिलता है। वह गदरपुर, किच्छा, दिनेशपुर और पंतनगर तक सामान की डिलीवरी करती हैं। बताती हैं कि किसी कारण से वह दसवीं से आगे की पढ़ाई नहीं कर पाई।
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बच्चों के खातिर नहीं की सिडकुल में नौकरी
मनीषा ने बताय कि उनकी दोस्त सिडकुल की कंपनी में काम करती हैं। वह अक्सर बताती थी कि कंपनी में छुट्टियों को लेकर दिक्कत होती है। उसे बेटियों को भी समय देना था, लिहाजा कंपनी में काम नहीं किया। डिलीवरी गर्ल के काम में जब उसका मन करता हैं बेटियों से मिलने टनकपुर चली जाती हैं।
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