पंतनगर। लंपी स्किन डिजीज (एलएसडी) पशुओं में होने वाली संक्रामक बीमारी है। ये दुधारू पशुओं में वाह्य परजीवियों जैसे मच्छर, मक्खी और किलनी आदि के जरिये बहुत तेजी से फैलती है। इसके अलावा दूषित पानी, लार और चारे के जरिये यह बीमारी दूसरे पशुओं में भी फैल जाती है। इसलिए पशुपालकों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की जरूरत है।
जीबी पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय स्थित पशु चिकित्सा विज्ञान महाविद्यालय के अधिष्ठाता एवं वरिष्ठ पशु वैज्ञानिक डॉ. एनएस जादौन ने बताया कि लंपी स्किन डिजीज अफ्रीकी बीमारी है, जिसकी शुरुआत जांबिया से हुई थी। इस बीमारी से पीड़ित पशुओं के शरीर में गांठें पड़ जाती हैं और बुखार होता है। संक्रमित सांड़ भी सीमन के जरिये वायरस का उत्सर्जन कर सकते हैं।
रोग का पता ऐसे लगाएं : डॉ. जादौन ने बताया कि रोग का पता लगाने के लिए पीसीआर सबसे कम खर्चीली विधि है। संक्रमित पशु की त्वचा की गांठें और पपड़ी, लार, नाक से स्राव और रक्त नमूने लेते हैं। पशुओं में रोग के लक्षण प्रदर्शित होने पर निकटतम पशु चिकित्सकों से संपर्क करना चाहिए।
बरते एहतियात : एलएसडी नियंत्रण के लिए पशुओं को संक्रमित क्षेत्रों में आवाजाही पर प्रतिबंध, प्रभावित जानवरों को हटाने, बाहरी व्यक्तियों का पशुशाला में प्रवेश निषेध, कार्यरत व्यक्तियों के कपड़े, जूते उतरवाकर सैनिटाइजेशन के बाद ही प्रवेश, मुख्य द्वार पर फुट बाथ की व्यवस्था करें।
बचाव के उपाय : तीन माह से अधिक आयु के पशुओं का टीकाकरण आवश्यक है। टीकाकरण के लिए स्वदेशी लंपी प्रोवैकइंड और गोटपॉक्स वैक्सीन का उपयोग कर सकते हैं। पशुओं में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए गिलोय, आंवला, अश्वगंधा आदि का उपयोग करना चाहिए।
पशुपालन विभाग को गोटपॉक्स वैक्सीन के नहीं मिले 16 हजार टीके
रुद्रपुर। गोवंशीय पशुओं में एलएसडी वायरस की रोकथाम के लिए पशुपालन विभाग को गोटपॉक्स वैक्सीन के 16 हजार डोज नहीं मिल पाए हैं जबकि विभाग को यूपी से सटे गांवों में गोवंशीय पशुओं में वैक्सीनेशन भी करना था।
उत्तराखंड में हरिद्वार के बाद यूएस नगर जिले में भी एलएसडी वायरस को लेकर पशुपालन विभाग सतर्क है। हालांकि जिले में गोवंशीय पशुओं में अभी एलएसडी वायरस को नहीं देखा गया है। विभाग की ओर से एहतियात बरतने के लिए यूपी से सटे बॉर्डर इलाकों के गांवों में गोवंशीय पशुओं को टीका लगाया जाना है। यूपी बॉर्डर पर पशुपालन विभाग की टीम गोवंशीय पशुओं पर नजर रख रही है ताकि यूपी से कोई पशु जिले में प्रवेश न कर सके। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. एसबी पांडेय ने बताया कि जिले में 16 हजार गोटपॉक्स वैक्सीन की मांग निदेशालय से की गई है। उम्मीद है कि जल्द वैक्सीन मिलेगी। वैक्सीन मिलने के बाद यूपी बॉर्डर से सटे गांवों में कैंप के माध्यम से गोवंशीय पशुओं में टीकाकरण किया जाएगा।